किसान आंदोलनः फतेहाबाद में भाजपा के उपवास कार्यक्रम में किसानों ने फाड़े पोस्टर

किसान आंदोलनः फतेहाबाद में भाजपा के उपवास कार्यक्रम में किसानों ने फाड़े पोस्टर

कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने के लिए दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे किसानों का आंदोलन आज 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने के लिए दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे किसानों का आंदोलन आज 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है। कड़ाके की ठंड और अपनों की जान भी किसानों का इरादा नहीं डिगा सकी है।

किसानों का कहना है कि चाहे कितनी ही ठंड क्यों न पड़े हम यहां से तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक सरकार तीनों काले कानून वापस नहीं लेती। वहीं आंदोलन के चलते आज भी दिल्ली के कई बॉर्डर बंद हैं और कई रास्ते डायवर्ट किए गए हैं।

गौतमबुद्ध नगर जिले में डीएनडी फ्लाईवे के नजदीक दलित प्रेरणा स्थल पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) के पदाधिकारियों ने शनिवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष केंद्र सरकार को सद्बुद्धि दिए जाने की प्रार्थना की। 

धरना स्थल पर किन्नर समाज के लोगों ने पहुंचकर किसानों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया तथा वहां पर कृषि कानूनों के खिलाफ गाना गाकर नृत्य भी किया। यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि आज सभी पदाधिकारियों एवं किसानों ने दलित प्रेरणा स्थल पर लगी डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के समक्ष सरकार को सद्बुद्धि दिए जाने की प्रार्थना की।

चिल्ला बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पहुंचीं तेलंगाना की अभिनेत्री के लक्ष्मी पार्वती। वह यहां कुछ देर रहीं और किसानोंं का समर्थन किया, उनके बीच बैठीं और फिर निकल गईं।

नए कृषि कानून के विरोध में आज बड़ौत में खाप चौधरियों द्वारा तीसरा मोर्चा खोला है। देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह के बड़ौत स्थित आवास पर किसानों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही जारी रहा।

इसके बाद किसान ट्रैक्टर ट्रॉलियाें में सवार होकर दिल्ली सहारनपुर हाईवे जाम करने के लिए निकल गए। शामली की गठवाला खाप के अलावा असारा कि मुस्लिम खाप पंचायत ने भी दिया समर्थन।

फतेहाबाद में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उपवास रखा। इस दौरान हरियाणा के फतेहाबाद में किसानों ने पुलिस बैरिकेड्स उखाड़ दिए और नारेबाजी करते हुए बीजेपी के उपवास स्थल पर पहुंच गए। किसानों ने भाजपा के उपवास टेंट में घुसकर भाजपा के पोस्टर फाड़ दिए। पुलिस भी किसानों को रोकने में नाकाम रही। उपवास कार्यक्रम में घुसकर किसानों ने नारेबाजी की।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने शनिवार को कहा कि, 'सरकार को बात करनी चाहिए, हम सरकार से बात करने के लिए कहां मना कर रहे हैं। फूड सप्लाई चेन को किसानों ने बंद नहीं किया है और न हमारी बंद करने की योजना है।

किसान आंदोलन के चलते आज भी सिंघु, औचंदी, पियाऊ मनियारी और मंगेश बॉर्डर पूरी तरह से बंद रहेंगे। लामपुर, साफियाबाद सबोली और सिंघु स्कूल टोल टैक्स बॉर्डर के वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। मुकरबा और जीटी करनाल रोड से ट्रैफिक डायवर्ट है तो रिंग रोड, जीटी करनाल रोड और एनएच 44 की तरफ न जाने की सलाह दी गई है।

हरियाणा के झरोडा, दौराला, कापसहेड़ा, बडूसराय, रजोकरी एनएच8, बिजवासन/बजघेड़ा, पालम विहार और डुंडहेड़ा बॉर्डर खुले रहेंगे।

टिकरी और धांसा बॉर्डर पूरी तरह से बंद हैं। झटीकरा बॉर्डर सिर्फ दो पहिया वाहनों और पैदल वाहनों के लिए खुला है।

चिल्ला बॉर्डर पर दिल्ली से नोएडा आने वाला लेन खुला है, हालांकि नोएडा से दिल्ली जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग की है। मायावती ने ट्वीट कर कहा है कि केंद्र सरकार को तीन नए कृषि कानूनों को लेकर आंदोलित किसानों के साथ हठधर्मी वाला नहीं बल्कि सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को स्वीकार कर तीनों कानूनों को तत्काल वापस ले लेना चाहिए।

Also Read
नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मायावती ने उठाई मांग
किसान आंदोलनः फतेहाबाद में भाजपा के उपवास कार्यक्रम में किसानों ने फाड़े पोस्टर

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-यूपी बाॅर्डर पर डटे प्रदर्शनकारी सोलर पैनल से फोन और ट्रैक्टर की बैटरी चार्ज करते देखे गए हैं। एक किसान अमृत सिंह ने बताया, 'सोलर प्लेट लेकर आए हैं कि अगर फोन की बैटरी डाउन हो जाएगी तो घर पर बात नहीं हो पाएगी, सरकार क्या सुविधा देगी वो हमारी मांग तो मान नहीं रही।'

कृषि कानूनों की खिलाफत के दौरान शहीद हुए किसानों की याद में शनिवार को सिंघु बॉर्डर पर सुबह दो घंटे के लिए पाठ होगा। सुबह नौ बजे से पाठ शुरू हो चुका है ताकि इस आंदोलन में कुर्बानी देने वालों की आत्मा को शांति मिल सके।

इस आंदोलन में अलग अलग वजहों से अब तक 29 किसान शहीद हो चुके हैं। इनमें सिंघु, टीकरी बॉर्डर के अलावा हरियाणा, पंजाब से किसानों के हक की लड़ाई की मुहिम शुरू करने वाले शहीदों के नाम शामिल हैं। सिंघु बॉर्डर पर रोजाना अरदास हो रही है।

शनिवार की सुबह शहीदों के नाम होगी, जहां किसान इस आंदोलन में खुद को न्यौछावर करने वालों को याद किया जाएगा। इसके बाद प्रसाद बांटे जाएंगे, फिर तमाम संगठनों के नेता किसानों को संबोधित करेंगे। इसके बाद आंदोलन के आगे की रणनीति बनाई जाएगी ताकि आंदोलन को और मजबूत किया जा सके। इनमें बाबा राम सिंह, माखन सिंह, लाभ सिंह, कुलविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह, अजय कुमार, लखवीर सिंह, मेवा सिंह, जतिन्दर सिंह, गुरदेव सिंह, जय सिंह सहित अन्य किसानों के नाम भी शामिल हैं।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान प्रदर्शनकारी आज 24वें दिन भी सिंघु बाॅर्डर पर डटे हुए हैं। एक 80 वर्षीय प्रदर्शनकारी रूमी राम ने बताया, 'बहुत मुश्किल हो रही है लेकिन सरकार किसानों के बारे में नहीं सोच रही है।'

Keep up with what Is Happening!

Related Stories

Best hindi news platform for youth
www.yoyocial.news