हैप्पी मदर्स डे: ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसलिए उसने माँ बनायी

मां, दुनिया के हर इंसान के लिए सबसे खास, सबसे प्यारा रिश्ता है। मां का प्यार वह ईंधन है, जो एक सामान्य इंसान को असंभव काम करने में सक्षम बनाता है। मां के इस प्यार को दिवस के रुप में भी मनाया जाने लगा है।
हैप्पी मदर्स डे: ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसलिए उसने माँ बनायी

' मां, दुनिया के हर इंसान के लिए सबसे खास, सबसे प्यारा रिश्ता है। मां का प्यार वह ईंधन है, जो एक सामान्य इंसान को असंभव काम करने में सक्षम बनाता है। मां के इस प्यार को दिवस के रुप में भी मनाया जाने लगा है। मई महीने में दूसरे हफ्ते के रविवार को 'मदर्स डे' मनाया जाता है।'

हालांकि, मां के लिए कोई एक दिन नहीं होता है, लेकिन वो अलग बात है कि एक खास दिन को मां के नाम निश्चित कर दिया गया है। इस साल यह खास दिन 9 मई को मनाया जा रहा है। यह दिवस लोगों को अपनी मां के प्रति भावनाओं को जाहिर करने का मौका देता है। ज्यादातर देशों में मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। लेकिन कई देशों में इस खास दिवस को अलग-अलग तारीखों पर भी मनाया जाता है।

मदर्स डे को लेकर कई मान्यताएं हैं। कुछ का मानना है कि मदर्स डे के इस खास दिन की शुरूआत अमेरिका से हुई थी। वर्जिनिया में एना जार्विस नाम की महिला ने मदर्स डे की शुरूआत की। कहा जाता है कि एना अपनी मां से बहुत प्यार करती थी और उनसे बहुत प्रेरित थी। उन्होंने न कभी शादी की और न कोई बच्चा था।

मां के निधन के बाद प्यार जताने के लिए उन्होंने इस दिन की शुरूआत की। फिर धीरे-धीरे कई देशों में मदर्स डे मनाया जाने लगा। ईसाई समुदाय के लोग इस दिन को वर्जिन मेरी का दिन मानते हैं। यूरोप और ब्रिटेन में मदरिंग संडे भी मनाया जाता है।

इससे जुड़ी एक और कहानी है जिसके अनुसार, मदर्स डे की शुरूआत ग्रीस से हुई थी। ग्रीस के लोग अपनी मां का बहुत सम्मान करते हैं। इसलिए वो इस दिन उनकी पूजा करते थे। मान्यताओं के अनुसार, स्यबेसे ग्रीक देवताओं की माता थीं और मदर्स डे पर लोग उनकी पूजा करते थे। मां का सभी के जीवन में योगदान अतुलनीय है। फिर चाहे उसे ऑफिस और घर दोनों जगह में संतुलन क्यों ना बैठाना पड़ा हो, मां ने कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा है।

उसकी जगह कोई और नहीं ले सकता है। भगवान हर जगह नहीं हो सकता है, और इसलिए उसने मां को बनाया।

9 मई, 1914 को अमेरिकी प्रेसिडेंट व्रुडो विल्सन ने एक कानून पारित किया था। इस कानून में लिखा था कि मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा। इसी के बाद से चीन, भारत समेत कई देशों में ये खास दिन मई के दूसरे रविवार को मनाया जाने लगा।

वैसे तो मां को प्यार करने और तोहफे देने के लिए किसी खास दिन की जरुरत नहीं, लेकिन फिर भी मदर्स डे के दिन मां को और सम्मान दिया जाता है। उन्हें तोहफे, मीठा और ढेर सारा प्यार किया जाता है। तो इस मदर्स डे के खास मौके पर अपनी मां के साथ समय बिताएं, वो सब करें जो व्यस्त होने के कारण आप नहीं कर पाते और मां को खास तोहफे देकर जरूर खुश करें।

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