न्याय और अन्याय के बीच उलझा हाथरस का बुलगड़ी गांव
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न्याय और अन्याय के बीच उलझा हाथरस का बुलगड़ी गांव

हाथरस के बुलगड़ी गांव में हुई 19 साल की लड़की से सामूहिक दुष्कर्म और फिर हत्या के बाद एक अजीब सा माहौल है। यहां के लोग न्याय और अन्याय के बीच उलझ कर रह गए हैं।

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हाथरस के बुलगड़ी गांव में हुई 19 साल की लड़की से सामूहिक दुष्कर्म और फिर हत्या के बाद एक अजीब सा माहौल है। यहां के लोग न्याय और अन्याय के बीच उलझ कर रह गए हैं। हर किसी की जुबान पर न्याय की बात है और हर किसी ने अपने हिसाब से तय कर लिया है कि कहां किसकी गलती रही होगी।

इस गांव में हर जाति के लोग रहते हैं। गांव वाले साथ में हर त्यौहार भी मनाते आएं हैं। अगर जाति समीकरण की बात करें तो करीब 25 हरिजन, 200 से अधिक ठाकुर और करीब इतने ही ब्राह्मण इस गांव में रहते हैं। करीब 25 कुम्हार और 4 से 5 नाई भी हैं।

इसी गांव के निवासी योगेंद्र सिंह का मानना है कि, पहले यहां सब कुछ नॉर्मल था, हर एक व्यक्ति अपने काम से काम रखता था। इस घटना के बाद से पुलिस का पहरा बहुत ज्यादा हो गया, अचानक से इस गांव में सब कुछ बदल गया।

योगेंद्र ने आईएएनएस को बताया, गांव में अब छोटी छोटी बातें तूल पकड़ सकती हैं। इस गांव में राजनीति ज्यादा होने लगी जो कि खतरनाक है।

उन्होंने आगे जिक्र करते हुए बताया, गांव में अब जो भी पीड़िता के परिवार से मिलने आतें हैं वो दूसरे समाज पर गाली गलौच करते हैं।

देर रात अंतिम संस्कार होने की बात पर योगेंद्र का कहना है कि, परिस्थितियों के हिसाब से चीजें होती हैं। अगर दिन में अंतिम संस्कार होता तो गांव का माहौल ज्यादा खराब होता, क्योंकि गांव में बाहर के लोग ज्यादा इकट्ठा हो जाते।

इस पूरी प्रक्रिया में ऐसी बातें निकल कर आ रहीं हैं जो अब समय के साथ साथ गलत सिद्ध हो रही हैं। हालांकि इस घटना में जो भी जांच होगी वो कानून के हिसाब से होनी चाहिए।

70 वर्ष के रामदेव तिवारी इसी गांव के निवासी हैं। उन्होंने बताया, घटना घटने के बाद हमें पता लगा, जबकि घटना स्थल से मैं करीब 200 मीटर दूर था लेकिन मैंने कोई आवाज नहीं सुनी।

पड़ोस गांव के रहने वाले एक शख्स ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, इस गांव में जातिवाद नहीं है, लेकिन गांव न्याय और अन्याय के बीच उलझ कर रह गया है।

इस घटना का असर भविष्य में होने वाले चुनावों और उनके परिणामों पर जरूर पड़ेगा।

हालांकि गांव की मौजूदा स्थिति की बात करें तो मुख्य सड़क से पीड़ित परिवार का घर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। लेकिन पुलिस का पहरा मुख्य सड़क से लेकर पूरे गांव के अंदर तक मौजूद है। गांव की हर एक छोटी सड़क पर हथियार बन्द सिपाही तैनात है।

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