सीमा विवाद पर चीनी रक्षामंत्री के साथ राजनाथ सिंह की अहम बैठक, दोनों देशों के बीच तनाव पर टिकी रही 2.20 घंटे की वार्ता
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सीमा विवाद पर चीनी रक्षामंत्री के साथ राजनाथ सिंह की अहम बैठक, दोनों देशों के बीच तनाव पर टिकी रही 2.20 घंटे की वार्ता

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके चीनी समकक्ष वेई फेंघे ने बैठक कर एलएसी पर चल रहे सीमा विवाद के मुद्दे पर चर्चा की। दोनों शंघाई सहयोग संगठन, सीएसटीओ और सीआईएस के रक्षा मंत्रियों की संयुक्त बैठक में भाग लेने के लिए मास्को में हैं।

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भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके चीनी समकक्ष वेई फेंघे ने शुक्रवार को बैठक कर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चल रहे सीमा विवाद के मुद्दे पर चर्चा की। दोनों शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) और कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (सीआईएस) के रक्षा मंत्रियों की संयुक्त बैठक में भाग लेने के लिए मास्को में हैं।

यह वार्ता 2 घंटे 20 मिनट तक चली। रूस की राजधानी मास्को में एक प्रमुख होटल में रात साढ़े नौ बजे (भारतीय समयानुसार) वार्ता शुरू हुई थी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा सचिव अजय कुमार और रूस में भारत के राजदूत डी बी वेंकटेश वर्मा भी थे।

इससे पहले राजनाथ सिंह रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित एक प्रतिनिधिमंडल के साथ, द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ की विजय को चिह्नित करने वाले 'विजय दिवस' की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बाद में राजनाथ और चीनी रक्षामंत्री के बीच हुई लंबी वार्ता का केंद्र बिंदु पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने के लिए बीच का रास्ता निकालने पर ही टिका रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष जनरल वेई फेंगहे से स्पष्ट तौर पर कहा कि पूर्वी लद्दाख में गतिरोध से पहले की स्थिति कायम करें। उन्होंने साफ कहा कि शांति के लिए चीन को सेना पीछे हटानी ही होगी।

पूर्वी लद्दाख में मई में सीमा पर हुए तनाव के बाद से दोनों ओर से यह पहली उच्च स्तरीय आमने सामने की बैठक थी। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल गतिरोध दूर करने के लिए चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ टेलीफोन पर बातचीत कर चुके हैं।

राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि पारंपरिक, गैर-पारंपरिक दोनों तरह के खतरों से निपटने के लिए संस्थागत क्षमता की आवश्यकता है।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि भारत स्पष्ट रूप से सभी रूपों में आतंकवाद और इसके समर्थकों की निंदा करता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के 75 साल पूरे हो गए हैं और संयुक्त राष्ट्र की उत्पत्ति के भी, जिसका मुख्य उद्देश्य शांतिपूर्ण विश्व बनाना था, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून और देश की संप्रभूता का सम्मान हो, किसी भी देश को एकतरफा आक्रामकता के शिकार होने से बचाया जा सके।

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