International Labour Day 2021: 1 मई को ही क्यों मनाया जाता है ‘श्रमिक दिवस’? जानिए इतिहास

International Labour Day 2021: 1 मई को ही क्यों मनाया जाता है ‘श्रमिक दिवस’? जानिए इतिहास

ये दिन दुनिया भर में मनाया जाता है और इसे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, मजदूर दिवस और मई दिवस जैसे नामों से भी जाना जाता है।

हर साल 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Labour Day) के रूप में मनाया जाता है। ये दिवस श्रमिकों की उपलब्धियों का जश्न मनाने और श्रमिकों के शोषण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

ये दिन दुनिया भर में मनाया जाता है और इसे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, मजदूर दिवस और मई दिवस जैसे नामों से भी जाना जाता है।

मजदूर दिवस का इतिहास

1889 में, मार्क्सवादी इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस ने एक महान अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के लिए एक संकल्प अपनाया, जिसमें उन्होंने मांग की कि श्रमिकों को दिन में 8 घंटे से अधिक काम करने के लिए नहीं बनाया जाना चाहिए।

इसके बाद, ये एक वार्षिक कार्यक्रम बन गया और 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

इससे पहले, मजदूरों का बहुत ही ज्यादा शोषण किया गया था क्योंकि उन्हें दिन में 15 घंटे काम करने के लिए बनाया गया था और ये 1886 का वक्त था कि श्रमिक एक साथ आए और अपने अधिकार के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया। विरोध में, उन्होंने प्रतिदिन 8 घंटे काम करने और पेड लीव्स के साथ प्रदान करने के लिए कहा।

भारत में, मजदूर दिवस 1923 में, चेन्नई में मनाया गया था। इस दिन को हिंदुस्तान की लेबर किसान पार्टी ने देखा।

इस दिन, कम्युनिस्ट नेता मलयपुरम सिंगारवेलु चेट्टियार ने भी सरकार से कहा कि इस दिन को श्रमिकों के प्रयासों और काम का प्रतीक बनाने के लिए राष्ट्रीय अवकाश के रूप में माना जाना चाहिए।

इस दिन को भारत में कामगर दिवस, कामगर दिन और अंर्तराष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

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