संत केशवानंद भारती के निधन पर जेपी नड्डा ने जताया शोक, कहा- सांस्कृतिक और संवैधानिक मूल्यों के लिए जाने जाएंगे
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संत केशवानंद भारती के निधन पर जेपी नड्डा ने जताया शोक, कहा- सांस्कृतिक और संवैधानिक मूल्यों के लिए जाने जाएंगे

जेपी नड्डा ने अपने शोक संदेश में कहा 'केरल के इडनीर मठ, कासरगोड के प्रमुख और आध्यात्मिक नेता स्वामी केशवानंद भारती जी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। आपके सामाजिक प्रयास, सांस्कृतिक और संवैधानिक मूल्यों के योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।'

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केरल के प्रसिद्ध संत केशवानंद भारती के निधन पर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शोक जताया है। उन्होंने कहा है कि स्वामी केशवानंद भारती को उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए याद किया जाएगा। स्वामी केशवानंद भारती ने रविवार सुबह इडनीर मठ में आखिरी सांस ली।

जेपी नड्डा ने अपने शोक संदेश में कहा 'केरल के इडनीर मठ, कासरगोड के प्रमुख और आध्यात्मिक नेता स्वामी केशवानंद भारती जी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। आपके सामाजिक प्रयास, सांस्कृतिक और संवैधानिक मूल्यों के योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।' स्वामी केशवानंद भारती की पहचान देश में संविधान के रक्षक के तौर पर रही है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1973 में उन्हीं की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि संविधान के मूल ढांचे को किसी भी कीमत पर नहीं बदला जा सकता। संसद से हुए किसी भी संविधान संशोधन की समीक्षा का कोर्ट को अधिकार है। भारतीय न्याय इतिहास में यह सबसे उल्लेखनीय फैसला माना जाता है। तब से अदालतों में सुनवाई के दौरान कई बार केशवानंद भारती केस का संदर्भ दिया जाता है।

केरल के कासरगोड़ जिले में इडनीर मठ के केशवानंद उत्तराधिकारी थे। तत्कालीन केरल सरकार ने धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन पर नियंत्रण करने के लिए भूमि सुधार कानून बनाए थे। इन कानूनों को संविधान की नौंवी सूची में रखा गया था। जिससे कि कोर्ट उसकी समीक्षा न कर सके। जिसके खिलाफ केशवानंद भारती ने 1970 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट के 13 जजों की बेंच ने 68 दिनों तक सुनवाई कर 1973 में चर्चित फैसला दिया था कि संविधान के मूल ढांचे को नहीं बदला जा सकता।

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