केजरीवाल का केंद्र सरकार पर हमला, बोलें कल पाक युद्ध कर दे तो क्या राज्य अपने-अपने टैंक खरीदेंगे?

राज्य कोविड की वैक्सीन खुद खरीदें। केंद्र की इस व्यवस्था पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बेहद दिलचस्प सवाल किया है। वे पूछते हैं कि मान लो पाकिस्तान हमला कर दे। तब क्या राज्य अपनी रक्षा के लिए निजी तौर पर हथियार खरीदते फिरेंगे।
केजरीवाल का केंद्र सरकार पर हमला, बोलें कल पाक युद्ध कर दे तो क्या राज्य अपने-अपने टैंक खरीदेंगे?

राज्य कोविड की वैक्सीन खुद खरीदें। केंद्र की इस व्यवस्था पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बेहद दिलचस्प सवाल किया है। वे पूछते हैं कि मान लो पाकिस्तान हमला कर दे। तब क्या राज्य अपनी रक्षा के लिए निजी तौर पर हथियार खरीदते फिरेंगे। केंद्र यह थोड़े ही कह सकता है कि यूपी ये वाले टैंक खरीद लें और पंजाब ये वाली तोप खरीद ले।

केजरीवाल ने यह दृष्टांत प्रधानमंत्री के नाम एक वीडियो संदेश में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि देश कोरोना वाइरस के खिलाफ जंग ही लड़ रहा है। ऐसे में लड़ाई का जिम्मा राज्यों पर थोप देना अनुचित है। राज्य वैक्सीन पाने के लिए आपस में प्रतिद्वंदिता करें क्या?

केजरीवाल ने केंद्र से अपील की कि वह वैक्सीनेशन अभियान में अपना रोल निभाते हुए समुचित मात्रा में वैक्सीन के डोज़ खरीदे ताकि दिल्ली और पूरे देश में लोगों का टीकाकरण किया जा सके। वैक्सीन पाने के लिए मैन्यूफैक्चरर से मोलतोल करने का भार राज्यों पर डालना ठीक नहीं।

आखिर हमारा देश वैक्सीन क्यों नहीं खरीद रहा। हम राज्यों पर यह काम नहीं डाल सकते। देश कोविड के खिलाफ जंग लड़ रहा है। अगर पाकिस्तान हमला कर दे तो हम क्या करेंगे? क्या दिल्ली से कहेंगे कि तुम इस गन का इंतजाम कर लो और यूपी से कि तुम वो टैंक खरीद डालो?

वैक्सीनेशन के काम में भारत दूसरे देशों से छह महीने पीछे चल रहा है। पहली वैक्सीन भारत में भारतीयों ने बनाई थी। हमें तभी से उसका उत्पादन और भंडारण शुरू कर देना था। हमने ऐसा किया होता तो दूसरी लहर में कुछ मौतों को रोका जा सकता था। भारत कोरोना वाइरस की दूसरी लहर में बुरी तरह पस्त हुआ है। 21 अप्रैल के बाद दो हजार लोग रोजाना मर रहे थे और 28 अप्रैल के बाद रोजाना तीन हजार।

कोरोना की पहली लहर में एक दिन में होने वाली की सबसे बड़ी संख्या 1200 से भी कम थी। दूसरी लहर में दिक्कत यह हुई कि इसके चढ़ाव के साथ ही वैक्सीनेशन में उतार आ गया क्योंकि हम सब वैक्सीन की मांग और सप्लाइ से जूझने लगे।

आज हालत यह है कि राज्यों के पास न तो 18 से 44 आयु वर्ग वालों के लिए समुचित मात्रा में वैक्सीन हैं न ही 45 साल से बड़े लोगों के लिए। और तो और बुधवार को प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात में जब हाइकोर्ट ने वैक्सीनों को लेकर सरकार की क्लास ली तो सरकारी वकील के पास असहाय स्थिति बयान करने के अलावा और कुछ न था।

उसने कहा कि सरकार ने सीधे खरीद के लिए फाइजर और मॉडर्ना से संपर्क किया था लेकिन दोनों ने साफ मना कर दिया। उनका जवाब था कि हम केवल केंद्र सरकार से बात करेंगे। विदेशी कंपनियों ने यही उत्तर संपर्क करने वाले सभी राज्यों को दिया है।

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