अलविदा कि नमाज में इस बार ऐसा नजारा नहीं दिखेगा
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अलविदा की नमाज आज, लॉकडाउन में इस बार घर में ही अदा करें, मुस्लिम विद्वानों-मौलानाओं की अपील

इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इण्डिया के चेयरमैन मौलाना राशिद फिरंगी महली ने कहा है कि घरों में रहकर अलविदा की नमाज अदा करें और इस दौरान लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का सख्ती से पालन करें. मस्जिदों में वही लोग नमाज अदा करें जो वहां स्थाई तौरपर रहते हैं.

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रमजान का पवित्र महीना खत्म होने को है. इस महीने का आखिरी जुमा यानी शुक्रवार अलविदा कहलाता है. इस दिन की नमाज का अलग ही महत्व होता है. अलग ही उत्साह होता है. इसे अलविदा की नमाज कहते हैं. इस दिन मुसलमान विशेष एहतेमाम करते हैं. लेकिन इस बार कोरोना के चलते लम्बे चले लॉकडाउन के हालात में अलविदा की नमाज का वो उत्साह, वो मंजर दिखाई नहीं देगा, जो हमेशा दिखाई देता रहा है.

इस बार यह सूना भले ही लगे, हालात के मद्देनजर जरूरी है और यही कारण है कि मुस्लिम विद्वानों, उल्माओं ने भी मस्जिदों का रुख न कर, घरों में ही अलविदा की नमाज पढने की सलाह दी है. सभी मुस्लिम संगठनों, इदारों, बुद्धिजीवियों और मौलानाओं ने कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन के चलते समस्त मुस्लिम समुदाय से घरों में ही रहकर अलविदा की नमाज अदा करने की अपील की है.

इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इण्डिया के चेयरमैन मौलाना राशिद फिरंगी महली ने कहा है कि घरों में रहकर अलविदा की नमाज अदा करें और इस दौरान लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को सख्ती से पालन करें. उन्होंने कहा कि मस्जिदों में वही लोग नमाज अदा करें जो वहां स्थाई तौर पर रहते हैं. बाकी सभी लोगों को घरों में ही नमाज पढनी चाहिये.

आप घरों में रहकर अलविदा की नमाज अदा करें और इस दौरान लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को सख्ती से पालन करें. मस्जिदों में वही लोग नमाज अदा करें जो वहां स्थाई तौर पर रहते हैं. बाकी सभी लोगों को घरों में ही नमाज पढनी चाहिये...मौलाना राशिद फिरंगी महली, चेयरमैन- इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इण्डिया, लखनऊ

इस बार लॉकडाउन के बीच रमजान का आखिरी जुमा यानी अलविदा पड़ रहा है. अलविदा का मतलब होता है रुखसत होना. यानी रमजान अब हमारे बीच रुखसत होने वाला है. जाहिरा तौर पर यह पाक मौका जब विदा हो रहा हो तो थोड़ी मायूसी लाजिमी है. यही कारण है कि अलविदा के मौके पर मुसलामन नमाज में अल्लाह से अगला रमजान पाने की इच्छा जताते हैं.

फिलहाल मौजूदा हालात में जब लॉकडाउन के कारण मस्जिदों में सामूहिक इबादत की मनाही है, लोगों को घरों पर ही रहकर अलविदा की नमाज ऐडा करनी होगी. जानकारों के अनुसार चूंकि जुमा और ईद-उल-फित्र की नमाज सामान्य नमाज से अलग होती है.

और इसके लिए खुतबा जरूरी होता है. ईद-उल-फित्र में खुतबा नमाज अदा करने के बाद पढ़ा जाता है जबकि जुमा में नमाज से पहले. मगर लॉकडाउन में अलविदा की नमाज घर पर जोहर की नमाज की तरह पढ़नी होगी. अलविदा के बाद लोग ईद की तैयारियों में तेजी से जुट जाते हैं. अपने परिजनों के लिए कपड़े की कवायद में लग जाते हैं. जिसको पहनकर ईद की नमाज अदा की जा सके.

लॉकडाउन के चलते इस बार मस्जिदों में न जाने की वजह से लोग अलविदा की नमाज तो अदा नहीं कर सकेंगे लेकिन घरों में जोहर की नमाज अदा करेंगे। ऐसे में उलमा-ए-कराम ने सभी से घरों में जोहर की नमाज अदा करने और मुल्क से कोरोना बीमारी के खात्मे की दुआ करने की अपील की है।

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