वर्तमान स्थिति को देख, 'बकरीद' पर जमीअत उलमा-ए-हिन्द की मुसलमानों को सलाह

भारत में इस बार बकरीद 21 जुलाई को मनाई जाएगी, इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार ईद उल अजहा बकरीद है। हालांकि कोरोना वायरस के चलते जमीयत उलमा ए हिन्द ने मुसलमानों को सलाह देते हुए कहा है कि...
वर्तमान स्थिति को देख, 'बकरीद' पर जमीअत उलमा-ए-हिन्द की मुसलमानों को सलाह

भारत में इस बार बकरीद 21 जुलाई को मनाई जाएगी, इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार ईद उल अजहा बकरीद है। हालांकि कोरोना वायरस के चलते जमीयत उलमा ए हिन्द ने मुसलमानों को सलाह देते हुए कहा है कि, कोरोना वायरस अभी समाप्त नहीं हुआ है इसलिये मस्जिदों या ईदगाहों में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई गाइडलाइन को सामने रखते हुए ईदुल अजहा की नमाज अदा करें। दरअसल इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से बकरीद का त्योहार 12वें महीने की 10 तारीख को मनाया जाता है। यानी बकरीब का त्योहार रमजान का महीने खत्म होने के 70 दिन के बाद मनाया जाता है।

जमीयत उलमा ए हिन्द के अनुसार, इस स्थिति में ज्यादा बेहतर है कि सूरज निकलने के बीस मिनट के बाद संक्षिप्त रूप से नमाज और खुतबा अदा करके कुरबानी कर ली जाए।

इसके अलावा जमीयत उलमा ए हिन्द ने बयान जारी कर कहा कि, देश, विशेषकर उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों की परिस्थितियों को देखते हुए मुसलमानों को सलाह दी जाती है कि फिलहाल प्रतिबंधित जानवरों की कुरबानी से बचें।

उन्होंने आगे कहा है कि, जिस जगह कुरबानी होती आई है और फिलहाल दिक्क़त है तो वहां कम से कम बकरे की कुरबानी अवश्य की जाए और प्रशासन के कार्यालय में दर्ज भी करा दिया जाए ताकि भविष्य में कोई दिक्क़त न हो।

जमीयत के मुताबिक, परिस्थितियों से मुसलमानों को निराश नहीं होना चाहिये और परिस्थितियों का मुकाबला शांति, प्रेम और धैर्य ही से हर मोर्चे पर करना चाहिये और कोरोना वायरस जैसी महामारी से सुरक्षा के लिये मुसलमानों को अधिक से अधिक दुआ करनी चाहिये।

दरअसल इस्लाम में सिर्फ हलाल के तरीके से कमाए हुए पैसों से ही कुरबानी जायज मानी जाती है।

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