कोरोना: सांसद कौशल किशोर ने सीएम योगी को लिखा पत्र, अस्पताल में एडमिट होने के लिए खत्म हो CMO की परमिशन

कोरोना: सांसद कौशल किशोर ने सीएम योगी को लिखा पत्र, अस्पताल में एडमिट होने के लिए खत्म हो CMO की परमिशन

सांसद ने पत्र में लिखा है कि उत्तर प्रदेश में एवं लखनऊ जनपद कई जगहों से मेरे पास कोविड-49 अति गंभीर मरीजों के परिवारजनों के फोन आ रहे है कि कोविड मरीजों को अस्पताल में दाखिले के लिए सीएमओ की अनुमति की आवश्यकता पड़ रही है।

कोविड मरीजों को अस्पताल में दाखिले के लिए सीएमओ की अनुमति की आवश्यकता को देखते हुए सांसद कौशल किशोर ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है कि अस्पताल में कोविड के मरीजों को एडमिट होने के लिए CMO की परमिशन खत्म कि जाए।

CMO के कहने पर ही मरीजों को अस्पताल में दाखिला मिल रहा है।

सांसद ने पत्र में लिखा है कि उत्तर प्रदेश में एवं लखनऊ जनपद कई जगहों से मेरे पास कोविड-49 अति गंभीर मरीजों के परिवारजनों के फोन आ रहे है कि कोविड मरीजों को अस्पताल में दाखिले के लिए सीएमओ की अनुमति की आवश्यकता पड़ रही है।

जनता पहले से ही भयावह स्थिति का सामना कर रही है मरीजों के परिजनों के लिए, ये व्यवस्था भयंकर परेशानी साबित हो रही है।

इस अति गंभीर समस्या के त्वरित निस्तारण एवं गंभीर मरीजों को भर्ती करने संबंधी मैं स्वयं अनगिनत फोन सीएमओ लखनऊ को प्रतिदिन करता हूं किंतु अत्यंत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि कोई सकारात्मक कार्यवाही मरीजों को भर्ती करने के संबंध में नहीं की जाती है और दो-दो दिन बाद पत्र जारी हो पाते हैं।

पत्र भी गैर जिम्मेदार तरीके से जारी किए जाते हैं जिस चिकित्सालय में बेड खाली होते हैं वहां का पत्र ना जारी कर वेटिंग वाले पत्र जारी कर दो तीन चिकित्सालय में मरीजों को भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है।

ऐसे यह अपने कर्तव्यों का इति श्री करते हैं उक्त व्यवस्था अत्यंत दुखदाई साबित हो रही है जिस कारण आम जनमानस में पसरकार के प्रति रोष भी प्रकट हो रहा है जो न्याय हित में सही नहीं है। प्रक्रिया के चलते मरीजों को अस्पताल में भर्ती के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है और उनके परिजन एक जगह से दूसरी जगह भागदौड़ कर रहे हैं।

इस व्यवस्था के चलते कई लोगों की जान भी चली गई है। जिला प्रशासन के एवं अन्य अधिकारियों के कट्रोलर ल रूम में जो भी नंबर उपलब्ध कराए गए हैं वह उठते ही नहीं हैं।

इसकी जांच हेतु कृपया आप शासन के उच्च अधिकारी जो सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही व्यस्त हैं उन्हें चला किसी गैर सीयूजी नंबर से फोन करा कर जांच कर सकते हैं फोन ना उठाने वाले कंट्रोल रूम के संबंधित अधिकारी के विरुद्ध भी जनता एवं न्याय हित में मुकदमा पंजीकृत करा कर कठोरतम कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।

इसी तरह की परिस्थिति ऑक्सीजन सिलिंडर के मामले में भी सामने आ रही है। ऑक्सीजन प्लांट और ऑक्सीजन फिलिंग केंद्रों पर बिना डीएम की अनुमति के किसी को ऑक्सीजन नहीं मिल रही। इसको लेकर लखनऊ के तालकटोरा आद्योगिक इलाके में ऑक्सीजन फैक्ट्री के बाहर एक दुर्भायार्ण र्ण घटना भी घट गई जब सिलिंडर के लिए लाइन में लगे लोग सरकारी अफसरों पर हमलावर हो गए।

स्वयं सरकार न कहा है कि कोविड संक्रमित 'सामान्य मरीज' (नॉन-सिरियस मरीज) होम क्ॉरंटीन में रहें। यह सरकार द्वारा ही सुझाया गया कदम है। सरकार के पास आज यह क्षमता नहीं है कि सभी कोविड मरीजों को अस्पताल में रख सके। ऐसे में जो मरीज होम क्वॉरंटीन हैं, यदि उनकी तबियत खराब होती है और उन्हें ऑक्सिजन की जरूरत पड़ती है उन्हें ऑक्सिजन कहाँ से मिलेगी?

अस्पतालों में ऑक्सीजन युक्त बेड का पहले से ही गंभीर संकट है। ऐसे में जो लोग घर पर रहकर कोविड का इलाज कर रहे हैं उनके लिए प्रशासन का यह कदम बहुत घातक है।

माननीय जी, आप समझ सकते हैं कि कोविड से पीड़ित मरीजों के परिजन बहुत त परेशान हैं। इस तरह की मरीजों को भर्ती की कार्यवाही उनके दुख को और बढ़ा रही है।

अतः महोदय जी आपसे जनहित में विनम्र अनुरोध है कि कृपया अस्पताल में कोविड मरीजों के भर्ती की व्यवस्था हर एक नागरिक को जो भी अति गंभीर हो सरल बनाइये। साथ ही साथ अस्पतालों व उपलब्ध बेडों का केंद्रीकृत डाटाबेस जारी हो जिससे कि लोग सीधे जाकर कोविड अस्पताल में अपने मरीजों को भर्ती करा सकें।

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