नागार्जुन सागर उपचुनाव 17 अप्रैल को, दिलचस्प मुकाबले के आसार

नागार्जुन सागर उपचुनाव 17 अप्रैल को, दिलचस्प मुकाबले के आसार

तेलंगाना में नागार्जुन सागर विधानसभा सीट के लिए 17 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में एक दिलचस्प मुकाबले होने जा रहा है।

तेलंगाना में नागार्जुन सागर विधानसभा सीट के लिए 17 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में एक दिलचस्प मुकाबले होने जा रहा है।

राज्य विधान परिषद के दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी जीत के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) इस सीट को बरकरार रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जबकि विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस भी इस सीट पर कब्जा जमाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

इस उपचुनाव में सभी तीन प्रमुख दलों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। टीआरएस, जो भगवा पार्टी से एक परिषद की सीट पर कब्जा करके और दूसरे को बरकरार रखते हुए भाजपा के विजय मार्च पर ब्रेक लगाने में कामयाब रही, वह जीत का सिलसिला जारी रखने की इच्छुक होगी।

परिषद चुनावों में हार के कारण भाजपा के मिशन 2023 को झटका लगा है। फिर भी यह विधानसभा उपचुनाव को टीआरएस के एकमात्र व्यावहारिक विकल्प के रूप में खुद को पेश करने का एक अवसर के रूप में इस्तेमाल करेगी।

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में टीआरएस से डबक विधानसभा सीट जीतने और दिसंबर में ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) के चुनावों में प्रभावशाली प्रदर्शन करने के बाद भाजपा मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी थी और टीआरएस से मोर्चा लेने के लिए आक्रामक हो गई थी।

उम्मीद है कि इस उपचुनाव में भगवा पार्टी कड़ी टक्कर दे सकती है। पार्टी यह दिखाने की भरसक कोशिश करेगी कि डबक में उसकी जीत और जीएचएमसी में प्रभावशाली प्रदर्शन कोई दिखावा नहीं था।

डबक में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद टीआरएस नागार्जुन सागर में सतर्कता के साथ आगे बढ़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सत्तारूढ़ पार्टी इस बार कोई मौका नहीं चूंकेगी। टीआरएस को यह बात अच्छी तरह पता है कि डबक में अति आत्मविश्वास के कारण उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा था, इसलिए पार्टी नेतृत्व अब सावधानी से सागर में अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।

पिछले साल दिसंबर में टीआरएस के विधायक नोमुला नरसिम्हैया की मृत्यु के कारण उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था।

2018 में नरसिम्हैया ने कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जना रेड्डी को 7,771 मतों के अंतर से हराया था। नरसिम्हैया ने जहां 83,655 वोट हासिल किए, वहीं जना रेड्डी ने 75,884 वोट हासिल किए। भाजपा की निवेदिता रेड्डी को केवल 2,675 वोट मिले।

डबक में टीआरएस ने एस. रामलिंगा रेड्डी की विधवा एस. सुजाता रेड्डी को मैदान में उतारा था। रामलिंगा रेड्डी की मृत्यु के कारण उपचुनाव कराना जरूरी हो गया था। हालांकि सहानुभूति कारक ने सत्ताधारी पार्टी के लिए काम नहीं किया, इसलिए पार्टी ने नागार्जुन सागर में नरसिम्हैया के बेटे को उम्मीदवार बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

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