निर्भया के गुनहगार
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justice@5.30... निर्भया को न्याय, चारों गुनहगारों को फांसी दी गई

चारो के हाथ पीछे बंधे थे. इन्हें मुकर्कर वक्त ठीक 5 बजकर 30 पवन जल्लाद के हाथों लीवर खींचने के साथ ही फांसी हो गई. इन्हें तब तक इसी फंदे पर छोड़ दिया गया जब तक ड़ाक्टर इन्हें मृत नहीं घोषित कर देते.

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निर्भया रेप केस के चारों गुनहगार आखिर तीहाड़ जेल के फांसी घर में फांसी के फंदे से लटका दिया गया. इससे पहले चारों अपराधियों पवन, अक्षय, मुकेश और विनय को चेहरे पर काला कपड़ा डालकर फांसी घर ले जाया गया. चारो के हाथ पीछे बंधे हुए थे. इन्हें मुकर्कर वक्त ठीक 5 बजकर 30 पवन जल्लाद के हाथों लीवर खींचने के साथ ही फांसी हो गई. इन्हें तब तक इसी फंदे पर छोड़ दिया गया जब तक डाक्टर इन्हें मृत नहीं घोषित कर देते. 6 बजकर 14 मिनट पर डॉक्टर ने इनकी जांचकर इन्हें मृत घोषित कर दिया गया. इनके शवों को उतार कर अब सफदरजंग अस्पताल भेजा जायेगा, जहा पोस्टमार्टम के बाद इनके शव परिजनों को सौंप दिया जायेंगे. यदि किसी के परिजन शव लेने से इंकार कर देते हैं तो जेल परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया जायेगा.

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद निर्भया के दोषियों के वकील एक तरफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. तो वहीं चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारी जेल में चल रही थी. फांसी से ऐन पहले तक चारों दोषी अपने सेल में थे और बेचैनी में आखिरी वक्त गुज़ारटे रहे. जिस सेल में ये दोषी थे , वहां से सीधे रास्ता फांसी दिए जाने वाली जगह पर जाता है.

सिर्फ दो दोषियों ने खाया खाना

फांसी से पहले चारों दोषियों में से सिर्फ मुकेश और विनय ने ही रात का खाना खाया, लेकिन पवन और अक्षय ने खाना नहीं खाया. एक तरफ वकील एपी सिंह आरोप लगा रहे हैं कि दोषियों को परिवार से नहीं मिलने दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर दोषी मुकेश के परिवार ने फांसी से कुछ देर पहले आखिरी मुलाकात की.

चारों दोषी इस वक्त तिहाड़ की जेल नंबर 3 में रखा गया है. इनमें एक दोषी वार्ड नंबर 1 में है, दूसरा दोषी वार्ड नंबर 7 की सेल में है और बाकी दो दोषी नंबर 8 सेल में हैं. इन सेल के रास्ते सीधे फांसी वाली जगह तक जुड़ते हैं.

रात भर चला कोर्ट के इर्द गिर्द ड्रामा

इससे पहले आज रात भर एकबार फिर से दिखाई दिया कि कानूनी दांव-पेंच क्या होता है? जब निर्भया के दोषियों ने फांसी से बचने के लिए रात 10 बजे एक बार फिर से दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने इनकी इस याचिका पर सुनवाई भी शुरू की. दरअसल निर्भया के दोषियों ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए फांसी रोकने की मांग की है, लेकिन हाई कोर्ट ने इनकी याचिका को खारिज कर दी .

इसके बाद दूसरे वकील ने दोषियों की ओर से बहस शुरू की और मेरिट का मुद्दा उठाया, वकील शम्स ख्वाजा ने कहा कि राष्ट्रपति ने दोषियों की दया याचिका खारिज करने से पहले सभी सूचनाओं को संज्ञान में नहीं लिया. इस हाईकोर्ट ने शम्स ख्वाजा को सख्त फटकार लगाते हुए कहा कि यह समय केस के मेरिट पर बहस करने का नहीं है.

इस पर वकील ने कहा कि ये न्याय नहीं है.कुछ गलत हो रहा है.

इस पर अदालत ने कहा कि जब एक जज फैसले पर हस्ताक्षर कर देता है तो वह फिर से उस केस को छू नहीं सकता है. जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संजीव नरूला वकीलों के रुख से खासे रुष्ट नजर आये. जस्टिस द्वय ने कहा कि हम फांसी के लिए सुबह 5.30 बजे तक भी सुनवाई करने को तय्यार हैं और आर्डर जरूर देंगे. दोनों जजों ने कहा,- 'आप हमारे मेहमान बनिए हम 5.30 बजे तक सुनवाई करने को तय्यार हैं.'

हाई कोर्ट की इस बेंच ने पहले एक वकील एसपी सिंह की याचिका रद्द की उसके बाद शम्स ख्वाजा को भी फटकार लगाई और उनकी याचिका भी ख़ारिज कर दी.

हाई कोर्ट ने आधी रात 12 बजे के बाद ठीक 12 मिनट बीतते-बीतते फांसी रोकने की दोनों वकीलों की याचिकाएं ख़ारिज कर सुबह 5.30 बजे तक फांसी का रास्ता साफ़ कर दिया. हालाँकि इनके पास अभी भी साढ़े 5 घंटे का वक्त है, जिसके दौरान ये सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं. खबर लिखे जाने तक दोषियों के वकील अंतिम दांव खेलने में लगे हुए थे.

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