आखिर न्याय मिला
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ताजा तरीन

7 साल... 3 महीने... 3 दिन का इंतजार... ... झोले से बेटी की तस्वीर निकाली और चूम कर कहा, बेटी आज तुझे न्याय मिल गया!

निर्भया के चारो गुनहगारो को फांसी दरअसल इस मां आशा देवी के उस संघर्ष की जीत है, जिसमें इस मां ने कोई भी दिन आराम से नहीं काटा और भयावह घटना के दिन से आज तक बेटी के न्याय के लिये लडती रही.

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निर्भया के चारो गुनहगारो को फांसी दरअसल इस मां आशा देवी के उस संघर्ष की जीत है, जिसमें इस मां ने कोई भी दिन आराम से नहीं काटा और भयावह घटना के दिन से आज तक बेटी के न्याय के लिये लडती रही.

निर्भया की मां ने कहा- महिला सम्मान की जीत हुई है. इस केस में चारों फांसियों से कानून के प्रति विश्वास बढ़ा कि बेटियों की सुरक्षा के प्रति हमरा देश, समाज और कानून सचेत है तो कानून की वो कमियां भी सामने आईं कि ऐसे जघन्य मामले में भी इतनी देर कैसे हो सकती है.

बोलीं- देश कानून के प्रति सम्मान बढ़ा, लोगों का विश्वास बढ़ा लेकिन यह न्याय तभी होगा जब देश की हर बच्ची खुद को सुरक्षित मानेगी. कोई भी मां अपनी बेटी की चिंता में परेशान नहीं होगी. निर्भया का संघर्ष तभी पूरा माना जायेगा जब हर बच्ची को न्याय मिले. ऐसे हर केस में फांसी हो.

हर दिन लड़ती रही मां...

निर्भया के चारो गुनहगारो को फांसी दरअसल इस मां आशा देवी के उस संघर्ष की जीत है, जिसमें इस मां ने कोई भी दिन आराम से नहीं काटा और भयावह घटना के दिन से आज तक बेटी के न्याय के लिये लड़ती रही. आशा देवी ने आज रात सुप्रीम कोर्ट से बाहर आने के बाद सबसे पहले अपने झोले से बेटी निर्भया की तस्वीर निकल और चूम कर कहा, बेटी आज तुझे न्याय मिलने जा रहा है!

राजधानी दिल्ली में 7 साल पहले हुए इस भयावह केस में अंतिम रात भी दांवपेंच चलते रहे और गुरुवार देर रात तक दिल्ली हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक दोषियों के वकील ने फांसी को टालने की पुरजोर कोशिश की. दिल्ली हाई कोर्ट से दोषियों को राहत नहीं मिली है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में ये मामला सुना गया और खारिज हुआ.

इस सब के बीच निर्भया का परिवार उनकी बेटी के साथ हुई बर्बरता के इंसाफ का इंतजार करता रहा. हालांकि, ये घड़ी आने में काफी लंबा वक्त लग गया है. 7 साल, 3 महीने और 3 दिन बाद आखिर निर्भया के दोषियों को इंसाफ मिला. 20 मार्च 2020 के तडके 5 बजकर 30 मिनट पर वो घड़ी आ ही गई.

कैसे बीता यह लम्बा वक्त...

6 दिसंबर, 2012: दिल्ली के मुनीरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया. इस मामले में दरिंदगी की वो सारी हदें पार की गईं, जिसे देखकर-सुनकर कोई दरिंदा भी दहशत में आ जाए. वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था. दोषियों ने उसके साथ भी मारपीट की थी. इसके बाद युवती और दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया था.

18 दिसंबर, 2012: दिल्ली पुलिस ने 4 दोषियों (उस वक्त आरोपी) राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया.

21 दिसंबर, 2012: पुलिस ने एक नाबालिग को दिल्ली से और छठे दोषी अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार किया.

29 दिसंबर, 2012: पीड़िता का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे सिंगापुर भेजा गया. वहां अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई. पीड़िता की मां ने बताया था कि वह आखिरी दम तक जीना चाहती थी.

3 जनवरी, 2013: पुलिस ने पांच वयस्क दोषियों (उस वक्त आरोपी) के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण, डकैती का केस दर्ज करने के बाद चार्जशीट दाख़िल की.

17 जनवरी, 2013: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांचों दोषियों पर आरोप तय किए.

11 मार्च 2013: इसी बीच तिहाड़ जेल में राम सिंह ने खुदकुशी कर ली.

31 अक्टूबर, 2013: जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग दोषी को गैंगरेप और हत्या का दोषी करार दिया. उसको तीन साल के लिए सुधार गृह में भेज दिया गया.

10 सितंबर, 2013: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को दोषी ठहराया.

13 सितंबर, 2013: कोर्ट ने चारों दोषियों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को मौत की सजा सुनाई.

13 मार्च, 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा.

15 मार्च, 2014: सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को फांसी दिए जाने पर लगाई रोक.

20 दिसंबर, 2015: नाबालिग अपराधी को बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया, जिसे लेकर देशभर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए.

27 मार्च, 2016: सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा.

5 मई, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी. सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया कांड को सदमे की सुनामी करार दिया.

9 नवंबर, 2017: एक दोषी मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा बरकरार रखने के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया.

दिसंबर, 2019: करीब ढाई साल के बाद दोषी अक्षय की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर की गई.

दिसंबर, 2019: निर्भया की मां की तरफ से भी सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका के खिलाफ याचिका दायर की गई.

7 जनवरी, 2020: दिल्ली की एक अदालत ने चारों दोषियों को 22 जनवरी, सुबह 7 बजे फांसी देने का वक्त मुकर्रर किया.

8 जनवरी, 2020: पवन ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की. इसके बाद मुकेश की तरफ से भी ऐसा ही किया गया.

14 जनवरी, 2020: मुकेश की ओर से राष्ट्रपति के सामने दया याचिका लगाई गई, जो खारिज हो गई. लेकिन दया याचिका की प्रक्रिया की वजह से फांसी को टाल दिया गया और 1 फरवरी, सुबह 6 बजे का नया वक्त तय हुआ.

30 जनवरी, 2020: एक-एक करके पवन, अक्षय और विनय की ओर से कानूनी दांव खेले गए. जिसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट को रद्द किया और 3 मार्च की तारीख तय की गई.

2 मार्च, 2020: पवन गुप्ता की तरफ से राष्ट्रपति के पास याचिका दी गई, जिसके बाद 3 मार्च की तारीख भी रद्द हो गई. फांसी की नई तारीख 20 मार्च तय हुई.

19 मार्च, 2020: निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. वकील की तमाम कोशिशों के बाद रात 12 बजे हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया.

20 मार्च 2020: वकील एपी सिंह देर रात सुप्रीम कोर्ट गए. रात ढाई बजे से स्पेशल बेंच ने सुनवाई शुरू की. करीब एक घंटा सुनवाई चली और कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. जिससे सुबह 5.30 बजे फांसी का फाइनल डिसीजन हो गया.

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