Air India के पायलटों की सैलरी में कटौती का विरोध, ICPA ने की प्रबंधन और अधिकारियों के रवैये की आलोचना
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Air India के पायलटों की सैलरी में कटौती का विरोध, ICPA ने की प्रबंधन और अधिकारियों के रवैये की आलोचना

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पायलटों की ओर से लिखे गए इस पत्र में कहा 'वंदे भारत मिशन के तहत विदेश में फंसे भारतीय को वापस लाने की पायलटों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. आज की तारीख तक 60 से अधिक पायलट कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं.'

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कोरोनाकाल के दौरान बहार देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए उड़ान भरने वाले एयर इंडिया के करीब 60 पायलटों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है. यह जानकारी एयरलाइन की ओर से सरकार को लिखे पत्र में दी गई है. नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पायलटों की ओर से लिखे गए इस पत्र में कहा 'वंदे भारत मिशन के तहत विदेश में फंसे भारतीय को वापस लाने की पायलटों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. आज की तारीख तक 60 से अधिक पायलट कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं.'

इस पत्र में पायलटों की सैलरी में भारी कटौती का विरोध करते हुए कहा गया 'इसका इन पायलटों के परिवार के सदस्‍यों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है.' सीनियर पायलटों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा 'पायलटों के वेतन को 75% तक कम करने का सरकार का निर्णय "भेदभावपूर्ण और मनमाने तरीके से लिया गया है और इसका घातक प्रभाव हो सकता है.' गौरतलब है कि एयर इंडिया पर लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. सरकार की ओर से इस एयरलाइन को बेचने की कोशिश कर की जा रही लेकिन अभी तक कोई अच्‍छी डील सामने नहीं आई है.

एयर इंडिया के पायलटों ने सबसे पहले चीन के वुहान में फंसे भारतीयों को बचाने के लिए उड़ान भरी थी और अब वे दुनियाभर के देशों में फंसे हुए भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए वंदे भारत योजना के तहत उड़ानों का संचालन कर रहे है.

बता दें अब तक दुनियाभर से 7,73,000 से अधिक भारतीय वतन लौटे हैं. मंत्री ने कहा 'हमारी हमेशा यही कोशिश रहेगी कि हम हर फंसे हुए भारतीय तक पहुंच सकें." 16 जुलाई को केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा था "आपको यह तय करना होगा कि क्‍या आप एयर इंडिया को बचाना चाहते हैं. यदि एयर इंडिया को बंद करना है तो उनमें से किसी को भी नौकरी नहीं मिलेगी. आज विमानों और प्रशिक्षित लोग बहुतायत में उपलब्ध हैं.'

इतना ही नहीं मंत्रीजी कुछ कर्मचारियों को 5 साल के समय तक के लिए बिना वेतन के छुट्टी पर भेजने के एयर इंडिया के फैसले को सही ठहरा रहे हैं.

एयर इंडिया ने कहा था कि कोरोनो वायरस महामारी के कारण इसकी वित्तीय स्थिति खस्‍ताहाल है. गौरतलब है कि भारत और अन्य देशों में कोरोना से 'लड़ने' के लिए हवाई यात्रा पर लगे प्रतिबंधों ने न केवल देश में बल्कि दुनिया भर में एयरलाइनों को बुरी तरह प्रभावित किया है. भारत में सभी एयरलाइंस ने ऐसे में वेतन में कटौती, लीव विदाउट पे और कर्मचारियों की संख्या को कम करने जैसे उपाय किए हैं.

उधर, इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन (आईसीपीए) ने एयर इंडिया द्वारा प्रस्तावित 60 फीसद वेतन कटौती को खारिज कर दिया है और एयरलाइन के प्रबंधन और अधिकारियों के इस रवैये की आलोचना की है। इस मुद्दे पर हाल ही में आयोजित आईसीपीए उत्तरी क्षेत्र की आम सभा की बैठक में चर्चा की गई जहां 90 फीसद सदस्यों ने भाग लिया।

प्रबंधन के साथ विभिन्न बैठक के बारे में सदन को जानकारी देते हुए, पदाधिकारियों ने कहा कि शुरुआत में बैठकें आशाजनक और सार्थक दिखीं, हालांकि, प्रबंधन और अधिकारियों का इस प्रकार का रवैया बातचीत की सही भावना में नहीं था और साथ ही वेतन में अनुचित कटौती का प्रस्ताव किया गया था, जिसे आईसीपीए द्वारा खारिज कर दिया गया।

इसमें कहा गया कि घर से प्राप्त सुझावों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय होना और सभी पायलटों द्वारा एक याचिका पर हस्ताक्षर करके प्रबंधन को उजागर करना है। यह भी माना गया कि 25 फीसद लंबित धन जो कि अवैध रूप से रखा गया था, इसे देने के लिए प्रबंधन ने अदालत में सहमति व्यक्त की थी, उसका भी भुगतान तुरंत किया जाए।

इसके साथ ही कहा गया कि घर से प्राप्त सुझावों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय होना और सभी पायलटों द्वारा एक याचिका पर हस्ताक्षर करके प्रबंधन को उजागर करना है। यह भी माना गया कि 25 प्रतिशत लंबित धन जो कि अवैध रूप से रखा गया था, इसे देने के लिए प्रबंधन ने अदालत में सहमति व्यक्त की थी, उसका भी भुगतान तुरंत किया जाए। NHJ

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