सिरिंज इंडस्ट्री ने निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने का किया अनुरोध

ऑल इंडिया सिरिंज एंड नीडल मैन्युफैक्च र्स एसोसिएशन (एआईएसएनएमए) ने कहा, "एक वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में विश्वसनीयता बनाने में बहुत प्रयास और साल लगते हैं और सीरिंज के निर्माण केंद्र के रूप में भारत की प्रतिष्ठा भरोसेमंद नहीं होगी।"
सिरिंज इंडस्ट्री ने निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने का किया अनुरोध

सीरिंज और चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के भारतीय संघों ने सरकार से गैर-कोविड वैक्सीन सीरिंज के निर्यात को बैन नहीं करने का आग्रह किया है। उन्होंने सरकार से सीरिंज की त्रैमासिक जरूरतों पर विशेष रूप से 2022 की पहली तिमाही के लिए मार्गदर्शन के साथ आने के लिए भी कहा है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय ने सोमवार को अधिसूचित किया कि सुइयों के साथ या बिना सीरिंज को मुफ्त सूची से प्रतिबंधित सूची में ट्रांसफर कर दिया गया है।

ऑल इंडिया सिरिंज एंड नीडल मैन्युफैक्च र्स एसोसिएशन (एआईएसएनएमए) ने कहा, "एक वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में विश्वसनीयता बनाने में बहुत प्रयास और साल लगते हैं और सीरिंज के निर्माण केंद्र के रूप में भारत की प्रतिष्ठा भरोसेमंद नहीं होगी।"

भारत द्वारा आवश्यक सीरिंज के निर्यात को प्रतिबंधित नहीं करने के लिए सरकार से अपील करते हुए एआईएसएनएमए ने आश्वासन दिया कि "उद्योग हमेशा घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देगा।"

सरकार की कार्रवाई पर निराशा व्यक्त करते हुए एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री फोरम के समन्वयक राजीव नाथ ने कहा कि "डेंगू और टाइफाइड में बढ़ोत्तरी को देखते हुए मानक डिस्पोजेबल सिरिंजों की बढ़ती मांग के कारण आपूर्ति चेन प्रबंधन जुलाई-सितंबर तिमाही में देश में चुनौती भरा होगा, लेकिन नवंबर के मध्य से मांग में कमी आएगी।"

उन्होंने कहा कि 20 सीरिंज निर्माताओं को गैर-कोविड उपचारात्मक देखभाल पर प्राथमिकता के रूप में ध्यान देना चाहिए और इसके बाद टीकाकरण प्रीवेंटिव देखभाल और निर्यात प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए।

नाथ ने सरकार से आग्रह किया कि फाइजर के लिए बनाए गये गैर-कोविड सीरिंज जैसे इंसुलिन सीरिंज, 5 मिली या बड़े सिरिंज आकार या 0.3 मिली ऑटो डिसेबल (एडी) सीरिंज पर प्रतिबंध ना लगाएं।

एआईएमईडी ने सरकार से पिछले साल अक्टूबर-जनवरी के दौरान 0.5/1/2/3 एमएल के निर्यात की 50 प्रतिशत मात्रा के निर्यात की अनुमति देने का भी आग्रह किया है।

एआईएमईडी के सचिव विशाल खेमका ने कहा, "देश मुख्य रूप से येलो फीवर या खसरा, हेपेटाइटिस बी, पेंटावैलेंट या बीसीजी आदि के लिए बच्चों के लिए वैश्विक टीकाकरण / टीकाकरण परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए भारत पर भरोसा कर रहे हैं। वे 0.5 मिली एडी आदि की कोवैक्स आपूर्ति के लिए उपयोग की जाने वाली सीरिंज नहीं हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "हम उन बच्चों को उन टीकाकरण प्रतिबद्धताओं से वंचित नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वे सीरिंज वैसे भी भारत में कोविड टीकाकरण के लिए उपयोग नहीं किए जाएंगे और हमारे कारखानों में बेकार रहेंगे, जिससे हमें भारी नुकसान होगा।"

नाथ ने यह भी कहा कि सीरिंज की कोई कमी नहीं है। यह सुनिश्चित करने के लिए कई भारतीय सिरिंज निर्माता, स्वैच्छिक आधार पर, पिछली तिमाही में और वर्तमान में भी, कई विदेशी खरीदारों से नए व्यापार निर्यात के अवसरों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

खेमका ने पहले आईएएनएस को बताया था कि सीरिंज के लिए कुल भारतीय बाजार का आकार लगभग 500 करोड़ होगा, जिसमें से सरकारी आपूर्ति लगभग 200 करोड़ पीस होगी और लगभग 150 करोड़ पीस का निर्यात होगा, जबकि शेष घरेलू संस्थागत और खुदरा बिक्री (अस्पताल, क्लीनिक) के लिए होगा।

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