UK से आने वाले यात्रियों को खुद कराना होगा RT-PCR टेस्ट

UK से आने वाले यात्रियों को खुद कराना होगा RT-PCR टेस्ट

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, 8 से 31 जनवरी के बीच यात्रा करने वालों को अनिवार्य रूप से संबंधित भारतीय हवाई अड्डों पर आगमन पर स्व-भुगतान आरटी-पीसीआर परीक्षण करवाना होगा।

यूनाइटेड किंगडम से भारत के लिए 8 से 31 जनवरी तक यात्रा करने वाले यात्रियों को अब हवाईअड्डे पर खुद के खर्चे पर अनिवार्य आरटी-पीसीआर परीक्षण करना होगा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी।

ब्रिटेन के लोगों में पाए जाने वाले एक अधिक संक्रामक कोरोनावायरस स्ट्रेन के मद्देनजर 22 दिसंबर को दोनों देशों के बीच उड़ान सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था। यह सेवाएं 6 जनवरी को फिर से शुरू होंगी। इस स्ट्रैन का अब तक भारत में 29 से अधिक यात्रियों में पता चला है।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, 8 से 31 जनवरी के बीच यात्रा करने वालों को अनिवार्य रूप से संबंधित भारतीय हवाई अड्डों पर आगमन पर स्व-भुगतान आरटी-पीसीआर परीक्षण करवाना होगा।

दिशा-निर्देश के अनुसार, "यात्रियों को यात्रा से कम से कम 72 घंटे पहले ऑनलाइन पोर्टल, डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट न्यूदिल्लीएयरपोर्ट डॉट इन पर स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा और इसके साथ नकारात्मक आरटी-पीसीआर परीक्षण भी लाना होगा। एयरलाइंस को बोर्ड पर यात्री को अनुमति देने से पहले नेगेटिव परीक्षण की उपलब्धता सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है।"

हवाई अड्डे पर कोरोना पॉजिटव पाए जाने पर उस व्यक्ति को राज्य स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा तय किए गए आइसोलेशन यूनिट के आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा। वे इस तरह के आइसोलेशन और उपचार के लिए विशिष्ट सुविधाएं निर्धारित करेंगे और जीनोम अनुक्रमण के लिए सकारात्मक नमूने भेजने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

एसओपी के अनुसार, जीनोम अनुक्रमण के बाद, यदि रिपोर्ट देश में पाए जा रहे वर्तमान वायरस जीनोम के अनुरूप है, तो घर में ही आइसोलेशन में रखा जाएगा। यदि जीनोमिक अनुक्रमण सार्स-सीओवी-2 की तरफ इशारा करेंगे तो रोगी को एक अलग आइसोलेशन इकाई में ही रख जाएगा। पहले जांच के 14 दिन बाद फिर से जांच की जाएगी और नेगेटिव आने तक उसी आइसोलेशन इकाई में ही रखा जाएगा।

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा था कि देश में चार और कोरोना म्यूटेंट स्ट्रेन का पता चला है, जिससे ऐसे मामलों की कुल संख्या बढ़कर 29 हो गई है, जिन्हें फीजिकल आइसोलेशन में रखा गया है।

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