नासिक के अस्पताल में ऑक्सीजन रिसाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

नासिक के अस्पताल में ऑक्सीजन रिसाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

नासिक के एक अस्पताल में ऑक्सीजन रिसाव की घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जहां ऑक्सीजन रिसाव के कारण 24 मरीजों की मौत हो गई।

नासिक के एक अस्पताल में ऑक्सीजन रिसाव की घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जहां ऑक्सीजन रिसाव के कारण 24 मरीजों की मौत हो गई।

एनजीओ सेव थेम इंडिया फाउंडेशन ने वकील विशाल तिवारी के माध्यम से दायर याचिका में इस घटना की जांच के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में शीर्ष अदालत से तीन सदस्यीय आयोग का गठन करने का निर्देश देने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि देश में असफल वितरण नीति के साथ चिकित्सा उपकरणों से संबंधित कमी देखी जा रही है। इसके साथ ही नासिक में ताजा घटनाक्रम का जिक्र किया गया है, जहां ऑक्सीजन की आपूर्ति रुकने से कई मरीजों ने जान गंवा दी। याचिका में इसे अधिकारियों की लापरवाही बताया गया है।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि इस संबंध में दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए। चिकित्सा उपकरणों के वितरण को लेकर भी दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह की स्थिति के कारण इस देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हेल्थकेयर के संबंध में लोगों को जीवन के अधिकार से वंचित किया गया है।

लापरवाही से हुई मौतों का जिक्र करते हुए इस याचिका में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 और 304 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग की गई है।

एक भयावह घटना में, ऑक्सीजन की आपूर्ति में रिसाव के कारण हाल ही में सप्लाई रुकने से नासिक के सार्वजनिक अस्पताल में 24 लोगों की मौत हो गई थी।

नासिक के अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखे गए 22 कोविड-19 रोगियों ने मृत्यु हो गई थी और बाद में दो अन्य ने भी दम तोड़ दिया था।

यह त्रासदी भाजपा के नियंत्रण वाले नासिक नगर निगम द्वारा संचालित डॉ. जाकिर हुसैन अस्पताल में हुई, जो कि सबसे बड़े नागरिक निकायों में से एक है। नासिक राज्य में सबसे खराब कोविड-19 हॉटस्पॉट में से एक है।

यह भी दलील दी गई है कि चिकित्सा उपकरणों के संकट की निगरानी के लिए एक तकनीकी समिति का गठन किया जाना चाहिए।

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