पीएम मोदी ने नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन संयंत्रों में बदलने के काम की समीक्षा की

पीएम मोदी ने नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन संयंत्रों में बदलने के काम की समीक्षा की

कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच चिकित्सा ऑक्सीजन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन उत्पादन के लिए मौजूदा नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन संयंत्रों में बदलने की व्यवहार्यता का पता लगाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन संयंत्रों में बदलने के काम की प्रगति की समीक्षा की। कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच चिकित्सा ऑक्सीजन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन उत्पादन के लिए मौजूदा नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन संयंत्रों में बदलने की व्यवहार्यता का पता लगाया है।

केंद्र ने मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए दो दर्जन से अधिक नाइट्रोजन उत्पादन संयंत्रों की पहचान की है।

प्रधानमंत्री ने समीक्षा बैठक के बाद ट्वीट करते हुए कहा है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति में तेजी लाने के लिए, सरकार नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन संयंत्रों में बदलने पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा है कि ऐसे संभावित उद्योगों की पहचान करके इन्हें परिवर्तित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि बैठक में मौजूदा प्रेशर स्विंग एड्सॉप्र्शन (पीएसए) नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।

नाइट्रोजन संयंत्रों में कार्बन मॉलिक्यूलर सीव (सीएमएस) का उपयोग किया जाता है, जबकि ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए जियोलाइट मॉलीक्युलर सीव (जेडएमएस) की आवश्यकता होती है। इसलिए, सीएमएस को जेडएमएस के साथ बदलकर और कुछ अन्य परिवर्तनों जैसे ऑक्सीजन एनालाइजर, कंट्रोल पैनल प्रणाली, प्रवाह वाल्व आदि के साथ मौजूदा नाइट्रोजन संयंत्रों में ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए परिवर्तित किया जा सकता है।

बयान में कहा गया है कि उद्योगों के साथ विचार-विमर्श के बाद अब तक 14 उद्योगों की पहचान की गई है, जहां नाइट्रोजन संयंत्रों के रूपांतरण का काम प्रगति पर है। इसके अलावा, उद्योग संघों की मदद से 37 नाइट्रोजन संयंत्रों की इस कार्य के लिए पहचान की गई है।

ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए संशोधित नाइट्रोजन संयंत्र को या तो पास के अस्पताल में स्थानांतरित किया जा सकता है और अगर इस संयंत्र को स्थानांतरित करना संभव नहीं है, तो इसका उपयोग ऑक्सीजन के ऑन-साइट उत्पादन के लिए किया जा सकता है, जिसे विशेष पोत/सिलेंडर से अस्पताल में पहुंचाया जा सकता है।

बैठक में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव, कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

ऐसे विभिन्न संभावित उद्योगों की पहचान की गई है, जिनमें मौजूदा नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए परिवर्तित किया जा सकता है। इन उद्योगों को जल्द से जल्द काम पूरा करने के लिए सुविधा प्रदान की जा रही है।

केंद्र का यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है, जब देश में कोरोनावायरस मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि जारी है। कोरोना के मामले शनिवार को चार लाख के आंकड़े को पार कर गए थे। रविवार को देश में पिछले 24 घंटों के दौरान 3,92,488 नए कोविड-19 मामले सामने आए। मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि से अस्पतालों पर दबाव काफी बढ़ चुका है और देश के अधिकांश अस्पतालों में जरूरी दवाओं और बिस्तर के साथ ही ऑक्सीजन की भारी कमी है।

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