National Youth Day पर बोले PM मोदी, 'कुछ बदलाव बाकी हैं और ये बदलाव देश के युवाओं को ही करने हैं'

National Youth Day पर बोले PM मोदी, 'कुछ बदलाव बाकी हैं और ये बदलाव देश के युवाओं को ही करने हैं'

पीएम ने कहा कि आज का ये दिन विशेष इसलिए भी हो गया है कि इस बार युवा संसद देश की संसद के सेंट्रल हॉल में हो रही है। ये सेंट्रल हॉल हमारे संविधान के निर्माण का गवाह है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दूसरे राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव (National Youth Parliament Festival) के समापन समारोह को संबोधित किया।

इस दौरान महोत्सव के तीन राष्ट्रीय विजेताओं ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और केन्‍द्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री किरन रिजिजु भी उपस्थित रहे।

पीएम ने कहा कि आज का ये दिन विशेष इसलिए भी हो गया है कि इस बार युवा संसद देश की संसद के सेंट्रल हॉल में हो रही है। ये सेंट्रल हॉल हमारे संविधान के निर्माण का गवाह है।

पीएम ने कहा कि समय गुजरता गया, देश आजाद हो गया, लेकिन हम आज भी देखते हैं, स्वामी जी का प्रभाव अब भी उतना ही है।

अध्यात्म को लेकर उन्होंने जो कहा, राष्ट्रवाद-राष्ट्रनिर्माण को लेकर उन्होंने जो कहा, जनसेवा-जगसेवा को लेकर उनके विचार आज हमारे मन-मंदिर में उतनी ही तीव्रता से प्रवाहित होते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने एक और अनमोल उपहार दिया है। ये उपहार है, व्यक्तियों के निर्माण का, संस्थाओं के निर्माण का. इसकी चर्चा बहुत कम ही हो पाती है।

मोदी ने कहा कि ये स्वामी जी ही थे, जिन्होंने उस दौर में कहा था कि निडर, बेबाक, साफ दिल वाले, साहसी और आकांक्षी युवा ही वो नींव है जिस पर राष्ट्र के भविष्य का निर्माण होता है। वो युवाओं पर, युवा शक्ति पर इतना विश्वास करते थे।

उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक कदम है। हम एक इको-सिस्टम बना रहे हैं, जो हमारे युवाओं को यहां बेहतर अवसर देगा।

मोदी ने कहा कि पहले देश में ये धारणा बन गई थी कि अगर कोई युवक राजनीति की तरफ रुख करता था तो घर वाले कहते थे कि बच्चा बिगड़ रहा है। क्योंकि राजनीति का मतलब ही बन गया था- झगड़ा, फसाद, लूट-खसोट, भ्रष्टाचार! लोग कहते थे कि सब कुछ बदल सकता है लेकिन सियासत नहीं बदल सकती।

उन्होंने कहा कि कुछ बदलाव बाकी हैं, और ये बदलाव देश के युवाओं को ही करने हैं। राजनीतिक वंशवाद, देश के सामने ऐसी ही चुनौती है जिसे जड़ से उखाड़ना है। अब केवल सरनेम के सहारे चुनाव जीतने वालों के दिन लदने लगे हैं। लेकिन राजनीति में वंशवाद का ये रोग पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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