बाढ़ की स्थिति पर प्रधानमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री से बात की, हरसंभव मदद का आश्वासन

गृह मंत्रालय (एमएचए) भी असम में बाढ़ की स्थिति की निगरानी कर रहा है और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) को असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अपनी बचाव टीमों को भेजने के लिए कहा है।
बाढ़ की स्थिति पर प्रधानमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री से बात की, हरसंभव मदद का आश्वासन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बात की और राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। पीएम ने बिस्वा को स्थिति को कम करने में मदद करने के लिए केंद्र से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

गृह मंत्रालय (एमएचए) भी असम में बाढ़ की स्थिति की निगरानी कर रहा है और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) को असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अपनी बचाव टीमों को भेजने के लिए कहा है।

आईएएनएस से बात करते हुए, एनडीआरएफ के डीजी एस.एन. प्रधान ने कहा कि बोंगाईगांव, बारपेटा, कामरूप, कछार, सिलचर, जोरहाट, शिवसागर और धेमाजी के गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में नौ टीमों को तैनात किया गया है और आठ और टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

रिपोटरें के अनुसार, 21 जिले गंभीर वर्षा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई और 30 अगस्त तक 3.63 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने कहा है कि मोरीगांव और बारपेटा जिलों में बाढ़ के पानी में एक-एक बच्चा बह गया।

एक आधिकारिक अनुमान के अनुसार, लखीमपुर जिले में 1.30 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, इसके बाद माजुली में 65,000, दरांग में 41,400, विश्वनाथ में 24,300, धेमाजी में 21,300 और शिवसागर जिले में 17,800 लोग प्रभावित हुए।

बाढ़ से 30,333 हेक्टेयर से अधिक की फसल नष्ट हो गई है और अब तक लगभग 950 गांव प्रभावित हुए हैं। राज्य प्रशासन ने 44 राहत शिविर स्थापित किए हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के 7,000 से अधिक लोगों को ठहराया है। सभी शेल्टर कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बनाए गए थे।

असम एसडीएमए के अनुसार, लखीमपुर सबसे अधिक प्रभावित जिला था, जहां 105,257 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे, इसके बाद माजुली में 57,256 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का पानी उनके घरों में घुसने के बाद कई लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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