Small Saving Schemes: छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को लेकर लिया गया फैसला

Small Saving Schemes: छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को लेकर लिया गया फैसला

वित्त मंत्रालय ने बताया कि जनवरी-मार्च तिमाही में भी छोटी बचत योजनाओं पर पहले जितनी ब्याज दर मिलती रहेगी। विश्लेषकों का कहना है कि पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए सरकार ने ब्याज दरें जारी रखने का फैसला किया है।

सुकन्या, पीपीएफ जैसी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में चौथी तिमाही के लिए भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों और अर्थव्यवस्था पर जारी दबाव को देखते हुए दरें अपरिवर्तित रखी जा रही हैं। 

वित्त मंत्रालय ने बताया कि जनवरी-मार्च तिमाही में भी छोटी बचत योजनाओं पर पहले जितनी ब्याज दर मिलती रहेगी। विश्लेषकों का कहना है कि पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए सरकार ने ब्याज दरें जारी रखने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय हर तिमाही छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरें निर्धारित करता है।

किस पर कितना ब्याज

पीपीएफ                7.1 फीसदी

एनएससी              6.8 फीसदी

सुकन्या                7.6 फीसदी

वरिष्ठ नागरिक बचत   7.4 फीसदी

एक साल एफडी          5.5 फीसदी

बचत जमा                4 फीसदी

पांच साल तक एफडी   6.7 फीसदी तक

पांच साल आरडी        5.8 फीसदी            

राहत : कपड़े पर नहीं बढ़ेगा जीएसटी

राज्यों और व्यापारियों के विरोध के बाद कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी की दर को 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है। हालांकि, जूते-चप्पल (फुटवियर) पर उपभोक्ताओं को 1 जनवरी, 2022 से 12 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना होगा।

जीएसटी परिषद की 46वीं बैठक के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि कपड़ा उत्पादों पर दर को लेकर भ्रम की स्थिति थी, इसलिए 1 जनवरी, 2022 से कर वृद्धि लागू नहीं करने का फैसला लिया गया। फुटवियर के लिए भी ऐसी ही मांग थी, जिस पर सहमति नहीं बनी। उन्होंने कहा कि दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए राज्यों के वित्तमंत्रियों के समूह को कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी के बारे में विचार करने को कहा गया है।

मंत्री समूह फरवरी अंत तक अपनी रिपोर्ट देगी। जीएसटी परिषद की 17 सितंबर को हुई पिछली बैठक में कपड़े और फुटवियर पर शुल्क को 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का फैसला किया गया था। वर्तमान में मानव निर्मित रेशे (एमएमएफ) पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। इससे बने धागे पर 12 फीसदी और कपड़े पर 5 फीसदी जीएसटी लगता है। जीएसटी परिषद की आगामी बैठक में फुटवियर पर टैक्स घटाने पर विचार हो सकता है। 

इन राज्यों ने किया था विरोध

गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों ने कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी दर बढ़ाने का विरोध किया था। उनका कहना था कि इस फैसले से आम आदमी और कारीगरों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

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