अद्भुत पल: वाटर कैनन से राफेल विमानों को दी गई सलामी, वायुसेना ने कहा- वेलकम होम 'Golden Arrows'
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अद्भुत पल: वाटर कैनन से राफेल विमानों को दी गई सलामी, वायुसेना ने कहा- वेलकम होम 'Golden Arrows'

भारतीय वायु सेना ने ट्विटर हैंडल पर इनकी तस्वीरों को भी शेयर किया। वायु सेना ने अपने ट्वीट में लिखा 'घर में स्वागत है 'गोल्डन एरो'। नीला आसमान हमेशा। एरो गठन (राफल्स) को एसयू -30 द्वारा औपचारिक स्वागत किया गया था।'

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फ्रांस से 7 हजार किलोमीटर का हवाई सफर तय करके 5 राफेल विमान बुधवार की दोपहर 3 बजे अंबाला एयरबेस पहुंच गए। भारतीय वायु क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद राफेल विमानों को दो सुखोई 30 एमकेआई ने अपने घेरे में ले लिया और इन्हें अंबाला एयरबेस तक लेकर आए।

लैंडिंग के बाद राफेल विमानों को पानी के छिड़काव (वॉटर कैनन) से सलामी दी गई है। ये सेना की परंपरा होती है की जब भी कोई लड़ाकू विमान भारत की सरजमी पर आता है तो सेना में विमान पर पानी के छिड़काव से सलामी दी जाती है और प्रार्थना की जाती है कि हमेशा हमारे देश की रक्षा करना।

भारतीय वायु सेना ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इनकी तस्वीरों को भी शेयर किया। वायु सेना ने अपने ट्वीट में लिखा 'घर में स्वागत है 'गोल्डन एरो'। नीला आसमान हमेशा। एरो गठन (राफल्स) को एसयू -30 द्वारा औपचारिक स्वागत किया गया था।' बता दें कि राफेल विमानों के बेड़े को वायु सेना ने 'गोल्डेन एरो' नाम दिया है।

सभी विमान एक एरो (तीर) की आकृति बनाते हुए उड़ान भर रहे थे। इनमें 5 राफेल विमान आगे की ओर थे और दो सुखोई विमान पीछे की ओर उड़ान भर रहे थे। बता दें कि 5 राफेल विमानों के इस बेड़े ने सोमवार को फ्रांस के शहर बोरदु से उड़ान भरी थी। बीच में ये विमान संयुक्त अरब अमीरात के अल धाफरा एयरबेस पर रुके थे। इन विमानों में 30 हजार फुट की ऊंचाई पर हवा में ही ईंधन भरा गया था, इस काम के लिए फ्रांस के टैंकर की मदद ली गई थी। 

राफेल लड़ाकू विमान भारत के दो दशकों में लड़ाकू विमानों का पहली बड़ी आपूर्ति है और इनसे भारतीय वायु सेना की युद्धक क्षमताओं को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार चीन के साथ सीमा विवाद के चलते इन विमानों को लद्दाख में तैनात किया जा सकता है।

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