RBI Monetary Policy: EMI पर कोई राहत नहीं, रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

छह अक्तूबर को शुरू हुई भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज समाप्त हो गई। कोरोना की दूसरी लहर के चलते अप्रैल और मई के दौरान देश के कई हिस्सों में लगाई गई सख्त पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा था।
RBI Monetary Policy: EMI पर कोई राहत नहीं, रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई गवर्नर ने लगातार 8वीं बार ब्याज दरों में कोई स्थिर रखा है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इस तिमाही भी रेपो रेट 4 फीसदी पर स्थिर रहेंगे और रिवर्स रेपो रेट की दर 3.55 फीसदी पर बरकरार रहेगी। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट 4.25 फीसदी रहेगा। 6 सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन दिनों की बैठक के बाद आज ब्याज दरें जारी की हैं।

छह अक्तूबर को शुरू हुई भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज समाप्त हो गई। कोरोना की दूसरी लहर के चलते अप्रैल और मई के दौरान देश के कई हिस्सों में लगाई गई सख्त पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा था। लेकिन अब पाबंदियों में थोड़ी ढील दी गई है। ऐसे में यह बैठक बेहद अहम है। हर दो महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होती है। इस बैठक में अर्थव्यवस्था में सुधार पर चर्चा की जाती है और साथ ही ब्याज दरों का फैसला लिया जाता है। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत दरों में संशोधन किया था।

9.5% रहेगी जीडीपी ग्रोथ

इसी के साथ रिजर्व बैंक ने देश की जीडीपी ग्रोथ को लेकर अपने अनुमान में भी कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक का मत है कि ये 9.5% के स्तर पर बनी रहेगी।

मौद्रिक नीति समिति ने जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को संशोधित करते हुए 7.3% के बजाय 7.9% कर दिया है। वहीं अक्टूबर-दिसंबर में इसके 6.3% के बजाय 6.8% और जनवरी-मार्च में 6.1% की दर से बढ़ने का अनुमान है।

इसी के साथ रिजर्व बैंक ने IMPS के माध्यम से होने वाली पेमेट की लिमिट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है।

एग्री सेक्टर में हुआ सुधार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि पिछली बैठक की तुलना में इस बार भारत की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। वहीं, खपत और एग्री सेक्टर की ग्रोथ में अच्छी रिकवरी देखने को मिल रही है। वहीं, औद्योगिक और सर्विस सेक्टर में अभी भी सुधार की जरूरत है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने फिस्कल ईयर 2021 के लिए जीडीपी की ग्रोथ रेट 9.5 फीसदी पर बरकरार रखा है।

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