आपदा प्रभावित उत्तराखंड में बचाव कार्य तेज

आपदा प्रभावित उत्तराखंड में बचाव कार्य तेज

उत्तराखंड में चमोली जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य सोमवार से तेज हो गए हैं। कई एजेंसियां मिलकर दोनों जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के अंदर फंसे हुए लोगों को बचाने में जुटी हुई हैं।

उत्तराखंड में चमोली जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य सोमवार से तेज हो गए हैं। कई एजेंसियां मिलकर दोनों जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के अंदर फंसे हुए लोगों को बचाने में जुटी हुई हैं। रविवार को आए जलप्रलय ने इन दोनों परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।

अधिकारियों ने कहा कि अब तक कुल 27 लोगों को बचाया गया है। मलबे से सोमवार सुबह 15 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि रविवार शाम तक 12 लोगों को निकाला गया था।

सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान बचाव उपकरणों और स्निफर डॉग्स के साथ सुरंग में पहुंचे और उसे खोला।

इससे पहले 2013 में आई केदारनाथ आपदा में इस पहाड़ी राज्य में अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान चलाया गया था। उस वक्त यहां 5,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि अब तक 11 शव बरामद किए गए हैं और लगभग 143 लोग अभी भी लापता हैं। रविवार की सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से लापता हुए श्रमिकों की सही संख्या पर अभी भी भ्रम बना हुआ है। राज्य के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा, "हमारे अनुमान के मुताबिक, कुल 153 लोग लापता हैं और 11 शव बरामद किए गए हैं।"

कुमार ने कहा कि बचावकर्मी ऑपरेशन में बुलडोजर, जेसीबी समेत कई मशीनों का इस्तेमाल कर रहे थे। कुमार ने कहा, "विष्णुगौड़ सुरंग में प्रवेश करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसमें एक घुमाव है। लेकिन हमें विश्वास है कि हमारे बहादुर जवान फंसे हुए लोगों को बचाने की पूरी कोशिश करेंगे।"

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा था कि रविवार को जिस समय आपदा आई, उस वक्त इन दोनों परियोजनाओं में करीब 176 लोग काम कर रहे थे।

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