जम्मू-कश्मीरः SIA ने आतंकवाद के वित्त पोषण मामले में 12 ठिकानों पर की छापेमारी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार श्रीनगर में यह छापेमारी शरीफ-दीन शाह पुत्र सईद गनी शाह के घर की गई जोकि सदात कालोनी मजदूर नगर रहते हैं। शरीफ वास्तविक तौर पर दक्षिण कश्मीर के लारनू कोकरनाथ के रहने वाला हैं।
जम्मू-कश्मीरः SIA ने आतंकवाद के वित्त पोषण मामले में 12 ठिकानों पर की छापेमारी

राज्य जांच एजेंसी (एसआइए) ने आज शुक्रवार सुबह जम्मू व कश्मीर में कई स्थानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी का सिलसिला आज सुबह शुरू हुआ। एसआइए की टीमों ने स्थानीय पुलिस की मदद से जम्मू व कश्मीर में करीब 12 जगहों पर छापेमारी की। सूत्रों ने बताया कि इस छापेमारी के दौरान कुछ दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। यह भी पता चला है कि यह छापेमारी हाल ही में हवाला मामले में गिरफ्तार हुए कांग्रेस के पूर्व मंत्री बाबू सिंह से पूछताछ के आधार पर की गई हैं। हालांकि एसआइए ने इस संबंध में कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार श्रीनगर में यह छापेमारी शरीफ-दीन शाह पुत्र सईद गनी शाह के घर की गई जोकि सदात कालोनी मजदूर नगर रहते हैं। शरीफ वास्तविक तौर पर दक्षिण कश्मीर के लारनू कोकरनाथ के रहने वाला हैं। टीम का नेतृत्व डीएसपी मोहम्मद शफी कर रहे थे।

इसी तरह की छापेमारी जम्मू में भी की गई हैं। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा हवाला मामले में गिरफ्तार किए गए कांग्रेस के पूर्व मंत्री बाबू सिंह से की जा रही पूछताछ के आधार पर यह छापे मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि कठुआ का रहने वाला बाबू सिंह हवाला मामले का मुख्य सरगना है। बाबू सिंह को देने के लिए ही मोहम्मद शरीफ शाह ने श्रीनगर से छह लाख रुपए की नकदी एकत्र की थी।

एजेंसी ने सिद्धांत शर्मा की भी पहचान की है, जिसे बाबू सिंह के साथ नकदी लेने के लिए जम्मू रखा गया था और बाद में अशोक बाली को शरीफ शाह से संपर्क करने के लिए नियुक्त किया गया। पूरे मामले से परत दर परत हटाते हुए पुलिस ने इस हवाला मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया। हालांकि पूर्व मंत्री बाबू सिंह इस बीच फरार हो गए थे परंतु बाद में पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपितों से जो छह लाख से अधिक राशि बरामद की गई, वे राशि बाबू सिंह तक पहुंचाई जानी थी।

आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबू सिंह 2002 में पीडीपी-कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। कठुआ के पूर्व मंत्री जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का विरोध भी करते आ रहे थे। पुलिस सूत्रों से यह बात भी पता चला है कि हवाला राशि के तहत पूर्व मंत्री को भेजी गई यह राशि जम्मू में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की जानी थी।

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