कोरोना और प्रवासियों के मुद्दों पर विपक्षी दलों संग बैठक करेंगी सोनिया, माया, अखिलेश और केजरीवाल नहीं होंगे शामिल
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कोरोना और प्रवासियों के मुद्दों पर विपक्षी दलों संग बैठक करेंगी सोनिया, माया, अखिलेश और केजरीवाल नहीं होंगे शामिल

विपक्षी दलों ने सरकार पर प्रवासी श्रमिकों से जुड़े इस संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया है. बैठक में कुछ प्रदेशों में श्रम कानूनों में किए गए हालिया बदलावों को लेकर भी चर्चा होगी.

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केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्षी दलों की एक बड़ी बैठक शुक्रवार को दोपहर 3 बजे होगी. विपक्ष की इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी करेंगी. इस बैठक में कोरोना संकट और प्रवासी मजदूरों के मुद्दों पर चर्चा होगी. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक में कांग्रेस की ओर से गुलाम नबी आजाद और एके एंटनी भी हिस्सा लेंगे. इस बैठक में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, एनसीपी नेता शरद पवार, डीएमके नेता एमके स्टालिन समेत 18 राजनीतिक दलों के नेता हिस्सा लेंगे.

तृणमूल कांग्रेस की ओर से बैठक में डेरेक ओ ब्रायन भी होंगे. बता दें कि ममता शुक्रवार को पीएम मोदी के साथ बंगाल में तूफान प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगी, इसलिए वह कुछ देर बाद बैठक में हिस्सा लेंगी.

वहीं, सूत्रों के हवाले से खबर है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और दिल्ली में सत्ता संभाल रही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने सोनिया की विपक्षी महाबैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है.

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह का कहना है कि पार्टी ऐसी किसी बैठक में हिस्सा नहीं लेने जा रही है. आप सांसद ने कहा 'ना तो पार्टी को ऐसी किसी बैठक की जानकारी है और ना ही पार्टी ऐसी किसी बैठक में हिस्सा ले रही है.'

हालांकि, ऐसा भी बताया जा रहा है कि इन तीनों पार्टियों के कांग्रेस के साथ अपने अलग राजनीतिक मतभेद हैं. लेकिन केंद्र की सत्ता पर काबिज एनडीए के लोगों को दावा है कि बीजेपी की तरफ इनके दृष्णिकोण में थोड़ी नरमी है.

सोनिया की अगुवाई में विपक्षी दलों की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से होने वाली बैठक में कोरोना वायरस के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों एवं आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा की जाएगी.

कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए गत 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लगने के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक बड़े शहरों से अपने घर जाने के लिए पैदल निकल गए हैं. कई जगहों पर हुई दुर्घटनाओं में कई मजदूरों की मौत भी हो गई है.

विपक्षी दलों ने सरकार पर प्रवासी श्रमिकों से जुड़े इस संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया है. बैठक में, कुछ प्रदेशों में श्रम कानूनों में किए गए हालिया बदलावों को लेकर भी चर्चा होगी. कुछ राज्यों में श्रम कानूनों में बदलाव करते हुए कामकाज के घंटों को बढ़ाया गया है.

बैठक में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष अजित सिंह, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और सीताराम येचुरी जैसे नेता भी होंगे. इसके अलावा जनता दल (सेक्युलर) से एचडी देवगौड़ा और नेशनल कॉन्फ्रेंस से फारुख अब्दुल्ला या उमर अब्दुल्ला में से कोई एक शामिल हो सकता है. हालांकि, इस बैठक में आम आदमी पार्टी की ओर से कोई शामिल नहीं होगा. आप के सूत्रों के मुताबिक, उन्हें इस बैठक के लिए निमंत्रण नहीं मिला.

पिछले दिनों पीएम मोदी के साथ बैठक में सीएम ममता ने केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा था कि ऐसे वक्त में केंद्र को राजनीति नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्य अच्छा काम कर रहा है.

इससे पहले 26 अप्रैल को सीएम उद्धव ठाकरे ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि हमने केंद्र से दाल मांगी, क्योंकि हम अपने राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लोगों को अनाज देते हैं, लेकिन हमारे पास सिर्फ चावल है. इसलिए हमने दाल और गेहूं की मांग की है जो हमें अब तक नहीं मिली. मुझे लगता है कि दाल में कुछ काला है लेकिन दाल तो आने दो.

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