श्रीलंका ने लिट्टे को आतंकवादी संगठन मानने के यूके के निर्णय की सराहना की

गुरुवार को कोलंबो में विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार को इस बात से अवगत कराया गया है कि यूके के गृह सचिव ने ब्रिटेन के आतंकवाद अधिनियम संख्या 7 के तहत लिट्टे पर प्रतिबंध को जारी रखने केफैसले का स्वागत किया।
श्रीलंका ने लिट्टे को आतंकवादी संगठन मानने के यूके के निर्णय की सराहना की

श्रीलंका ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) पर आतंकवादी संगठन के रूप में प्रतिबंध लगाने के ब्रिटेन के कदम की सराहना की है।

गुरुवार को कोलंबो में विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार को इस बात से अवगत कराया गया है कि यूके के गृह सचिव ने ब्रिटेन के आतंकवाद अधिनियम संख्या 7 के तहत लिट्टे पर प्रतिबंध को जारी रखने केफैसले का स्वागत किया।

आयोग ने ब्रिटेन में समूह को गैर-प्रतिबंधित करने के लिए लिट्टे के एक फ्रंट संगठन के आवेदन को खारिज कर दिया है।

मंत्रालय ने कहा, "लिट्टे यूके में एक प्रतिबंधित संगठन बना हुआ है, जैसा कि यह यूरोपीय संघ के क्षेत्र सहित दुनिया भर के 30 से अधिक अन्य देशों में प्रतिबंधित है।"

"लिट्टे को शुरू में इन देशों में प्रतिबंधित किया गया था क्योंकि समूह की क्रूरता और अत्याचारों के कारण वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही थी।"

यूके ने तमिल विद्रोही समूह को सूचीबद्ध किया, जो 2000 की शुरूआत में एक आतंकवादी संगठन के रूप में उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका से एक अलग क्षेत्र के लिए लड़ाई लड़ी।

हालांकि, अक्टूबर 2020 में प्रतिबंधित संगठन अपील आयोग(पीओएसी) ने लिट्टे को इस सूची से हटाने का निर्णय लिया था। मई 2019 में इसके लिए फ्रंट संगठन ने अपील की थी।

आयोग ने माना था कि यूके होम ऑफिस का लिट्टे को आतंकवादी संगठन के रूप में प्रतिबंधित रखने का निर्णय 'त्रुटिपूर्ण और गैरकानूनी' था।

हालांकि श्रीलंका ने आयोग के फैसले के खिलाफ अपील करते हुए कहा कि "यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि लिट्टे के अवशेष और इसकी आतंकवादी विचारधारा से जुड़े समूह सक्रिय हैं जो विदेशों में, हिंसा भड़काने और द्वीप राष्ट्र को अस्थिर करने के लिए काम कर रहे हैं।"

1991 में पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की हत्या के विद्रोही समूह पर आरोप लगने के बाद भारत ने लिट्टे पर प्रतिबंध लगा दिया था।

प्रतिबंध को समय-समय पर नवीनीकृत किया गया था और मई 2019 में केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (1967 का 37) की धारा 3 की उप-धारा (1) और (3) के तहत प्रतिबंध को पांच और वर्षों के लिए बढ़ा दिया था।

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