एक हफ्ते तक मुख्यमंत्री नहीं मिले तो छात्रों ने उनके पुतले को सौंपा ज्ञापन
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एक हफ्ते तक मुख्यमंत्री नहीं मिले तो छात्रों ने उनके पुतले को सौंपा ज्ञापन

सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग और जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला बंद करने के खिलाफ दिल्ली के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री आवास के समीप विकास भवन के बाहर सोमवार से चल रहा हैं।

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सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग और जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला बंद करने के खिलाफ दिल्ली के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री आवास के समीप विकास भवन के बाहर सोमवार से चल रहा हैं। रविवार को यहां छात्रों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पुतला बनाकर उस पुतले को ही अपना ज्ञापन सौंप दिया।

सिविल लाइंस स्थित विकास भवन के सामने चल रहे छात्रों के धरने तथा क्रमिक उपवास को रविवार को सातवां दिन हो चुका है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(अभाविप) के मुताबिक प्रदूषण तथा कोरोनावायरस के भय से रात दिन जूझ रहे छात्रों की सुध दिल्ली सरकार ने अभी तक नहीं ली है। रविवार को भी छात्र सरकार के किसी प्रतिनिधि के आकर बात करने के इंतजार में थे, परंतु सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का कोई संपर्क नहीं किया गया।

अभाविप के मुताबिक, दिल्ली सरकार की उदासीनता तथा तानाशाही का विरोध करते हुए छात्रों ने रविवार को मुख्यमंत्री का पुतला बनाकर उस पुतले को ही अपना ज्ञापन सौंप दिया। छात्रों ने पुतले के सामने हाथ जोड़ विनती की वह छात्रों की मांगों को मानें। पुतले को ज्ञापन देते समय जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के पदाधिकारी तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता मौजूद रहे।

अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव ने कहा, "छात्र , दिल्ली सरकार की नाक के नीचे बैठकर प्रदूषण तथा कोरोनावायरस की भयावहता को झेलते हुए अपनी मांगों के लिए पिछले एक सप्ताह से डटे हुए हैं। दिल्ली की सरकार झूठ फैलाने तथा कर्मचारियों के वेतन को लेकर प्रतिद्वंदिता की निम्न स्तरीय राजनीति में पड़ी हुई है।

बार-बार प्रदूषण पर चेतावनी जारी कर रही दिल्ली सरकार को यहां खुले में शाम की सर्द हवाओं तथा सड़क के किनारे भारी प्रदूषण झेल रहे छात्रों की कोई चिंता नहीं है। ऊपर से वह दिल्ली की जनता को हवाई किले बना कर गुमराह करने का काम कर रही है। हमारी मांगों को यदि नहीं सुना गया तो हम एक-दो दिन में प्रदर्शन और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे।"

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