कोरोना से मौतों पर मुआवजे में देरी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, महाराष्ट्र-राजस्थान को दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 से हुई मौत पर 50 हजार रुपये का मुआवजा देने में देरी को लेकर एक बार फिर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। अनुग्रह राशि देने में ढिलाई बरतने पर शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल को फटकार लगाई।
कोरोना से मौतों पर मुआवजे में देरी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, महाराष्ट्र-राजस्थान को दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 से हुई मौत पर 50 हजार रुपये का मुआवजा देने में देरी को लेकर एक बार फिर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। अनुग्रह राशि देने में ढिलाई बरतने पर शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल को फटकार लगाई।

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न की पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र में 1.41 लाख से अधिक कोविड मौतें दर्ज की गई हैं, लेकिन राज्य सरकार को कोविड मुआवजे के संबंध में केवल 12,000 आवेदन मिले हैं।

पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के वकील की खिंचाई करते हुए कहा कि मौतों की संख्या और बढ़ेगीष इसने पूछा कि कोविड के कम दावों के संबंध में सरकार के साथ आखिर क्या परेशानी है।

पीठ ने वकील से कहा, हम जो कुछ भी कह रहे हैं, वह अपनी सरकार (राज्य सरकार) को बताएं।

पीठ ने कहा कि 1.41 लाख मौतों में से, राज्य सरकार ने केवल कोविड मुआवजे के लगभग 4,000 दावों को मंजूरी दी है और दोहराया कि सरकार को कोविड मुआवजे की बेहद कम दर के साथ मुद्दों का समाधान करना चाहिए।

इसने महाराष्ट्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर मुआवजे का भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया।

पीठ ने विभिन्न मामलों पर डेटा प्रस्तुत करने में राजस्थान सरकार की विफलता पर भी असंतोष व्यक्त किया, जिसमें उन व्यक्तियों की संख्या के बारे में कोई जानकारी शामिल नहीं है, जिन्हें अब तक कोविड की अनुग्रह राशि के संबंध में मुआवजा दिया गया है।

अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, कितने दावों के संबंध में कोई विवरण नहीं दिया गया.. कैसे राज्य के पास अभी भी मुआवजे या किसी अन्य डेटा के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों की संख्या के आंकड़े नहीं हैं?

न्यायमूर्ति शाह ने कहा कि राजस्थान सरकार कुछ दबा रही है और आश्चर्य है कि आखिर उसके पास मुआवजे के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों की संख्या के आंकड़े क्यों नहीं हैं। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार, जिसने अब तक 9,000 के करीब कोविड की मौत दर्ज की है, प्राप्त आवेदनों पर डेटा के बिना मुआवजे का भुगतान कैसे कर सकती है।

पीठ ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने कोविड मुआवजे के संबंध में कई स्थानीय भाषा के कागजातों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी है, जिसमें उसने विज्ञापन दिया था। साथ ही, अंग्रेजी दैनिकों में विज्ञापनों, रेडियो विज्ञापनों और सोशल मीडिया पर विज्ञापनों की कोई जानकारी नहीं है।

पीठ ने केरल सरकार की भी खिंचाई की, जिसने अब तक 40,855 कोविड की मौत दर्ज की है। यह इंगित करते हुए कि राज्य में 40,000 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं और अब तक प्राप्त दावे 10,000 से अधिक हैं, पीठ ने कहा, यह खेद प्रकट करने की स्थिति है।

बीमारी के कारण अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों को किए गए भुगतान में ढिलाई बरतने पर चिंता व्यक्त करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने केवल 528 को कोविड मुआवजे का भुगतान किया है और कोविड के दावे के लिए 1,900 से अधिक आवेदनों को मंजूरी दी गई है। इसने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य के रूप में, यह राज्य का कर्तव्य है कि वह उन लोगों के परिजनों को मुआवजे का भुगतान करे जो महामारी के कारण मारे गए हैं।

इसने केरल सरकार से एक सप्ताह के भीतर कोविड मुआवजे का भुगतान पूरा करने को कहा।

शीर्ष अदालत ने अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल की याचिका पर यह टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 4 अक्टूबर के फैसले में, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा अनुशंसित, कोविड पीड़ितों के परिजनों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि को मंजूरी दी थी। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कई राज्यों को कोविड मुआवजे की कम वितरण दर पर नोटिस जारी किया था।

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