सुरजेवाला पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, CBI और ईडी प्रमुखों के कार्यकाल बढ़ाने वाले अध्यादेश को दी चुनौती

इस अधिसूचना के द्वारा मूलभूत नियमों में संशोधन किया गया है, जो सरकार को सक्षम बनाता है कि वह ईडी, सीबीआई प्रमुखों के साथ-साथ रक्षा, गृह और विदेश सचिवों के कार्यकाल का विस्तार कर सके।
सुरजेवाला पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, CBI और ईडी प्रमुखों के कार्यकाल बढ़ाने वाले अध्यादेश को दी चुनौती

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) निदेशकों के कार्यकाल को बढ़ाने के अध्यादेश के खिलाफ गुरुवार को कांग्रेस भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस संबंध में याचिका दाखिल करते हुए अध्यादेशों को रद्द करने की मांग की है। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2021 और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (संशोधन) अध्यादेश, 2021 के खिलाफ 14 नवंबर को कार्मिक मंत्रालय की 15 नवंबर की अधिसूचना के खिलाफ याचिका दायर की है। इस अधिसूचना के द्वारा मूलभूत नियमों में संशोधन किया गया है, जो सरकार को सक्षम बनाता है कि वह ईडी, सीबीआई प्रमुखों के साथ-साथ रक्षा, गृह और विदेश सचिवों के कार्यकाल का विस्तार कर सके।

एजेंसियों की स्वतंत्रता पर पड़ेगा असर: सुरजेवाला

सुरजेवाला ने शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के अध्यादेश से संबंधित जांच संस्थाओं की स्वतंत्रता पर स्पष्ट रूप से विपरीत असर होगा। सुरजेवाला ने यह आरोप भी लगाया कि इस तरह से अस्थायी रूप से और थोड़ी-थोड़ी अवधि के लिए सेवा विस्तार देने से जांच एजेंसियों पर कार्यकापालिका के नियंत्रण की अभिपुष्टि होती है और यह एजेंसियों के स्वतंत्र रूप से कामकाज करने के भी विपरीत है।कांग्रेस नेता ने कहा कि सीबीआई और ईडी के निदेशकों का दो साल का निर्धारित कार्यकाल होता है, लेकिन अब एक-एक साल का सेवा-विस्तार दिया जा सकेगा और यह एकमुश्त पांच साल का कार्यकाल नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसका मतलब यह होगा कि हर सेवा विस्तार नियुक्ति करने वाले प्राधिकार के विवेक और आत्मसंतुष्टि पर निर्भर करेगा। 

अब तक तीन याचिकाएं डाली गईं

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में ये तीसरी याचिका है इससे पहले, बुधवार को  टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी याचिका दाखिल की थी इसमें सीबीआई और ईडी के निदेशकों के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने की अनुमति देने वाले अध्यादेशों को चुनौती दी गई है। याचिका में दावा किया गया है कि अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ हैं।

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