लखनऊ: हिन्द की चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज का 400वाँ प्रकाश पर्व मनाया गया

प्रातः का दीवान 6.00 बजे श्री सुखमनी साहिब के पाठ से आरम्भ हुआ गुरूद्वारा साहिब का भव्य दीवान हाल बहुत खूबसूरती से सजाया गया था दीवान हाल के बीचो-बीच फूलों से सुसज्जित सुन्दर संगमरमर की पालकी साहिब में श्री गुरू ग्रन्थ साहिब का प्रकाश किया गया था।
लखनऊ: हिन्द की चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज का 400वाँ प्रकाश पर्व मनाया गया
Photos by Dheeraj Dhawan

सिखों के नौवें गुरु हिन्द की चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज का 400वाँ प्रकाश पर्व (जन्मोत्सव) शासन द्वारा जारी कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार सैनिटाइजिंग, मास्क एवं सोशल डिस्टेन्सिग प्रोटोकाल का पालन करते हुए श्री गुरू सिंह सभा, ऐतिहासिक गुरूद्वारा नाका हिंडोला, लखनऊ में बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया।

प्रातः का दीवान 6.00 बजे श्री सुखमनी साहिब के पाठ से आरम्भ हुआ गुरूद्वारा साहिब का भव्य दीवान हाल बहुत खूबसूरती से सजाया गया था दीवान हाल के बीचो-बीच फूलों से सुसज्जित सुन्दर संगमरमर की पालकी साहिब में श्री गुरू ग्रन्थ साहिब का प्रकाश किया गया था।

रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह जी ने अपनी मधुरवाणी में तेग बहादुर सिमरिअै घर नउ निधि आवै धाइि।। एवं अमृतमयी आसा की वार का शबद कीर्तन गायन किया।

ज्ञानी सुखदेव सिंह जी ने साहिब श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आप का जन्म मीरी पीरी के मालिक छठे गुरु हरिगोबिन्द साहिब जी एवं माता नानकी जी के यहाँ अमृतसर में हुआ था।

बचपन से ही आप संत स्वरुप गहरे विचारवान निर्भय व त्यागी स्वभाव के थे। आपके स्वभाव के अनुरुप आपका नाम त्यागमल रखा गया अपने पास जो भी चीज हो लोगों को निःसंकोच दे देनी।

एक बार अमृतसर के यु़द्ध में हाथ में तलवार पकड़कर दुश्मनों का मुकाबला किया और तलवार के खूब करतब दिखाये। तब आपके पिता श्री गुरु हरिगोबिन्द साहिब जी ने अपने लाडले पुत्र को कहा कि तुम तो तलवार चलाने मे बडे़ निपुण हो पंजाबी भाषा मे तलवार को तेग के नाम से जाना जाता है।

तब से आपका नाम त्यागमल से तेग बहादुर रख दिया। अमृतसर की लड़ाई के बाद आपका मन बैराग से भर गया। आपने लड़ाईयों मे भाग लेना छोड़ दिया और अमृतसर से कुछ दूर बाबा बकाला मे आकर भक्ति करने लगे और सिख संगतों को बैरागमयी उपदेश देकर उनके अन्दर भक्ति भावना पैदा करते थे और कहते थे कि संसार में सब कुछ नाशवान है। प्रभु का नाम ही मनुष्य के साथ जाता है।

ज्ञानी सुखदेव सिंह जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के चरणों में सरबत के भले एवं कोरोना बीमारी से छुटकारे की अरदास की। अरदास के उपरान्त उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन स0 सतपाल सिंह मीत ने किया।

दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष सरदार राजेन्द्र सिंह बग्गा जी ने नगरवासियों का साहिब श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का 400वें प्रकाश पर्व (जन्मोत्सव) हार्दिक बधाई देते हुए अपील की कि करोना बीमारी में सरकार द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करें।

प्रकाश पर्व के उपलक्ष में पिछले 10 दिन से चल रहे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के सहज पाठ की जिन बच्चों और भाईयों बहनों ने पाठ की सेवा की थी उन सबको गुरुद्वारा साहब की तरफ से पाठ करने वाली महिलाओं और बच्चों को अध्यक्ष महोदय द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

गुरुद्वारा साहिब में संगतों में थाली में पैक गुरु का लंगर वितरित किया गया और गुरुद्वारा साहिब के बाहर महामंत्री स0 हरमिन्दर सिंह टीटू एवं स0 हरविन्दरपाल सिंह नीटा, कुलदीप सिंह की देखरेख में सोशल डिस्टेन्सिग का पालन करते हुए दशमेश सेवा सोसाइटी के सदस्यों ने छोले चावल एवं हलुवे का लंगर वितरित किया गया ।

Keep up with what Is Happening!

No stories found.
Best hindi news platform for youth
www.yoyocial.news