निर्भया के दरिंदों का आखिरी दांव भी फेल! हाईकोर्ट सुबह फांसी के ठीक पहले तक भी सुनवाई को तैयार
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निर्भया के दरिंदों का आखिरी दांव भी फेल! हाईकोर्ट सुबह फांसी के ठीक पहले तक भी सुनवाई को तैयार

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा 'कोई एनेक्‍चर नहीं है, न एफिडेविट है, न पार्टीज का मेमो है. इस मामले में कुछ नहीं है. क्‍या आपके पास ये याचिका दाखिल करने की इजाजत भी है?'

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निर्भया के दोषियों को शुक्रवार तड़के फांसी पर लटका दिया जाना लगभग तय है. हालाँकि फांसी में अब जहां चंद घंटे बचे हुए हैं, तो वहीं दोषी इसे रोकने के लिए आखिरी घड़ी तक हर दांव अपना लेना चाहते हैं. तीन दोषियों ने वकील एपी सिंह के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट में फांसी पर रोक लगाने के लिए रुख तो किया, लेकिन कोर्ट ने बहाना बनाने के लिए कड़ी फटकार लगाई और यचिका रद्दकरने की बात कही. जिसके बाद साक्ष्य और जिरह की बात सुनते हुए कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले पर सुबह फांसी के समय के ठीक पहले तक यानी 5.30 बजे तक भी सुनवाई करने को तय्यार हैं. खबर लिखे जाने तक जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संजीव नरूला की बेंच में सुनवाई जारी थी.

इससे पूर्व हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा 'कोई एनेक्‍चर नहीं है, न एफिडेविट है, न पार्टीज का मेमो है. इस मामले में कुछ नहीं है. क्‍या आपके पास ये याचिका दाखिल करने की इजाजत भी है?'

जवाब में वकील एपी सिंह ने कहा 'कोरोना वायरस के चलते कोई फोटो कॉपी मशीन काम नहीं कर रही थी'. इस पर अदालत ने कहा 'आपने आज तीन अदालतों में पैरवी की है. आप नहीं कह सकते हैं कि चीजें एक्‍सेसिबल नहीं हैं. हम यहां रात 10 बजे भी आपको सुन रहे हैं'.

वकील ने कहा कि एक याचिका NHRC के पास भी लंबित है. उन्‍होंने सवाल उठाया कि अगर ये याचिकाएं लंबित हैं तो फांसी कैसे दी जा सकती है?

वहीं, एक दोषी पवन गुप्ता के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी गई है.

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