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गर्मी की छुट्टियों में होगा बड़ा बदलाव, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टी में कमी करने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गर्मी की छुट्टी इस बार सिर्फ दो हफ्ते की होगी. पहले सुप्रीम कोर्ट में आमतौर पर गर्मियों की सात हफ्ते छुट्टी होती थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टी में कमी करने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गर्मी की छुट्टी इस बार दो हफ्ते की होगी. पहले सुप्रीम कोर्ट में आमतौर पर गर्मियों की सात हफ्ते छुट्टी होती थी. सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि इस बार गर्मियों की छुट्टियों में बदलाव किया गया है. 8 मई से लेकर 19 जून के बीच गर्मियों में सुप्रीम कोर्ट विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करेगा.

गौरतलब है कि इस बारे में जजों ने अपनी सिफारिश से संबंधित फाइल चीफ जस्टिस एसए बोबडे को भेजी थी. सिफारिश में कहा गया था कि गर्मी की छुट्टियों को दो हफ्ते किया जाए. साथ ही कहा गया था कि बाकी छुट्टियों को भी पेंडिंग करने की बात है.

इस दौरान सुनवाई करने के लिए पांच बेंच बनाई गई हैं। हर बेंच में तीन जज होंगे। मुख्य न्यायधीश समेत कोर्ट के सभी जजों की बैठक में शुक्रवार को यह फैसला लिया गया। बेंच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नए, लंबित और तत्काल मामलों की सुनवाई करेंगीं। आमतौर देश की सबसे बड़ी अदालत में 18 मई से 6 जुलाई तक गर्मियों की छुट्टी होती है।इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग केस जल्द निपटाने के लिए सिंगल जज की बेंच सुनवाई करने का फैसला किया था। 13 मई से सिंगल बेंच ने भी काम करना शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच में कम से कम दो जज होते थे। सिंगल जज बेंच जमानत के मामलों में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) और सभी तरह के ट्रांसफर केसों की सुनवाई करेगी।

सिंगल जज बेंच सात साल तक की सजा के मामलों में जमानत या अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। अभी तक ऐसे मामलों में दो जजों की बेंच सुनवाई करती थी। पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने नियमों में बदलाव कर सिंगल जज बेंच को मंजूरी दी थी।

सुप्रीम कोर्ट जरूरी मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कर रहा

कानून मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट में 11.5 लाख केस पेंडिंग थे। कोरोना संकट की वजह से सुप्रीम कोर्ट बहुत ज्यादा जरूरी मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर रहा है।

इस दौरान सुनवाई करने के लिए पांच बेंच बनाई गई हैं. हर बेंच में तीन जज होंगे. मुख्य न्यायधीश समेत कोर्ट के सभी जजों की बैठक में शुक्रवार को यह फैसला लिया गया. बेंच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नए, लंबित और तत्काल मामलों की सुनवाई करेंगीं.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ. आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच में कम से कम दो जज होते थे. सिंगल जज बेंच जमानत के मामलों में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) और सभी तरह के ट्रांसफर केसों की सुनवाई करेगी.

कानून मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट में 11.5 लाख केस पेंडिंग थे. कोरोना संकट की वजह से सुप्रीम कोर्ट बहुत ज्यादा जरूरी मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर रहा है.

वर्तमान में, केवल एक या दो बेंच के न्यायाधीश घर से वीडियो लिंक पर जरूरी मामलों की सुनवाई कर रहे हैं. शीर्ष अदालत में कम से कम 60,000 मामले लंबित हैं, जिनमें कश्मीर, नागरिकता संशोधन अधिनियम और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर पर सरकार के फैसले को चुनौती देना शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि 17 मई से कोर्ट में छुट्टी होने वाली थी लेकिन लॉकडाउन के चलते करीब दो महीने से कोर्ट बंद हैं और कुछ जरूरी मामलों की ही वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये सुनवाई हो रही है.

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