वाराणसी: गंगाजल के बैक्टीरियोफाज दिलाएंगे कोरोना से मुक्ति, 5 डॉक्टरों की टीम ने किया सफल क्लीनिकल ट्रायल
ताज़ातरीन

वाराणसी: गंगाजल के बैक्टीरियोफाज दिलाएंगे कोरोना से मुक्ति, 5 डॉक्टरों की टीम ने किया सफल क्लीनिकल ट्रायल

कोरोना से मुक्ति दिलाने में गंगाजल का अहम योगदान हो सकता है। गंगाजल के बैक्टियोफॉज से कोरोना के नाश होने का दावा बनारस हिंदु विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मेडिकल साइंस की ओर से किया जा रहा है।

Yoyocial News

Yoyocial News

कोरोना से मुक्ति दिलाने में गंगाजल का अहम योगदान हो सकता है। गंगाजल के बैक्टियोफॉज से कोरोना के नाश होने का दावा बनारस हिंदु विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मेडिकल साइंस की ओर से किया जा रहा है।

बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ़ विजय नाथ (वीएन) मिश्रा ने बताया कि गंगा में वायरस से लड़ने के लिए बैक्टीरिया मिल रहे हैं। 1980 में यह पता चला कि बैक्टीरियोफेज सभी नदियों में मिलते हैं लेकिन गंगा में 1300 प्रकार के मिलते हैं। यमुना में 130 प्रकार के मिलते हैं। नर्मदा में 120 प्रकार के मिलते हैं। यह फेज गंगा जी के पानी में ज्यादा पाए जाते हैं। इसके निहितार्थ दो देशों ने जार्जिया और रूस ने समझा है। जार्जिया में कोई एंटीबायोटिक नहीं खाता है। वहां पर फेज पिलाकर इलाज किया जाता है। वहां प्रयोगशालाएं भी हैं। जहां पर एंटीबायोटिक का असर करना बंद हो जाता है वहां फेज या फाज से इलाज किया जाता है।

बीएचयू में 1980-90 के बीच जले हुए मरीजों को फाज के माध्यम प्रो़ गोपालनाथ ने इलाज किया। काफी मरीजों को ठीक किया। जब कोरोना आया तो डॉ़ बोर्सिकि ने बताया कि इनके विरूद्ध कोई लिविंग वायरस प्रयोग कर सकते हैं। जिस प्रकार टीबी के लिए बीसीजी का कर रहे हैं। बीसीजी में कोई दवा नहीं होती है। इसमें लाइव बैक्टीरिया होता है। इससे कोई नुकसान नहीं होता है। इससे टीबी खत्म होता है।

इसके लिए गंगा मामलों के एक्सपर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के एमिकस क्यूरी एडवोकेट अरुण गुप्ता ने अप्रैल में राष्ट्रपति को पत्र लिखा था। उसमें कहा था कि गंगाजल के औषधीय गुणों और बैक्टीरियोफाज का पता लगाया जाना चाहिए। लेकिन 10 मई को आईसीएमआर ने इसे यह कह कर रिजेक्ट कर दिया कि इसकी कोई क्लीनिकल स्टडी नहीं कि हम गंगा के पानी से कोई इलाज किया जा सके। फिर हम लोगों ने एक ग्रुप बनाया फिर रिसर्च शुरू किया। 112 जर्नल निकाले। हम लोगों ने एक रिसर्च की सोच दी। बैक्टीरियाफा की स्टडी की। इसका वायरोफाज नाम दिया।

गंगा मामलों के एक्सपर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के एमिकस क्यूरी एडवोकेट अरुण गुप्ता ने बताया कि गंगाजल में हजारों प्रकार के बैक्टीरियोफाज पाए जाते हैं। फाज का एक गुण होता है। यह शरीर में प्रवेश करने पर यह सभी प्रकार के वायरस को मार देता है। लॉकडाउन के बाद इसके रिसर्च में लग गया। तो पता चला कि फाज वायरस के अलावा श्वसन तंत्र वायरस को नष्ट कर सकता है। इस स्टडी को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा। इसे राष्ट्रपति ने आईसीएमआर को भेज दिया। लेकिन इस पर आईसीएमआर ने रिसर्च करने से मना कर दिया। बीएचयू की टीम से संपर्क किया। करीब 5 डाक्टरों की टीम बनाकर क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया है। पाया गया है यह फाज कोरोना को नष्ट कर सकता है।

Keep up with what Is Happening!

Best hindi news platform for youth
www.yoyocial.news