सरकार से आज की वार्ता के पहले राकेश टिकैत ने कहा - सरकार 700 बार बैठक करेगी तो हम जाएंगे, लेकिन हमारी मांगें नहीं बदलेंगी

सरकार से आज की वार्ता के पहले राकेश टिकैत ने कहा - सरकार 700 बार बैठक करेगी तो हम जाएंगे, लेकिन हमारी मांगें नहीं बदलेंगी

कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार के साथ किसान नेताओं की शुक्रवार को आठवें दौर की वार्ता से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार 700 बार भी बैठक करेगी तो हम करेंगे, लेकिन मांगें नहीं बदलेंगी।

कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार के साथ किसान नेताओं की शुक्रवार को आठवें दौर की वार्ता से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार 700 बार भी बैठक करेगी तो हम करेंगे, लेकिन मांगें नहीं बदलेंगी। केंद्रीय मंत्रियों के साथ होने वाली किसान संगठनों के नेताओं की इस बैठक में दो प्रमुख मुद्दों पर बातचीत होगी, जो तीन कृषि कानून और एमएसपी से जुड़े हैं। ये बैठक विज्ञान भवन में दोपहर दो बजे शुरू होगी, जिसके लिए राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर से रवाना हो गए हैं।

राकेश टिकैत ने आईएएनएस से कहा, सरकार 700 बार भी बैठक करेगी तो हम जाएंगे और एक ही मांग रखेंगे। किसानों की मांग बदल नहीं जाएगी।

सरकार को मांगों को वापस लेना होगा और आज भी हम यही बात करेंगे। इसके अलावा कोई और बात नहीं होगी।
किसान आंदोलन को आज 44वां दिन है, दोनों पक्षों के बीच 8 दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन अबतक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। सरकार और किसानों के बीच आज फिर से बैठक होनी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आज कोई हल निकलता है या नहीं? उधर आज की बैठक को लेकर अटकलों का बाजार गरम है। सूत्रों के अनुसार, आज सरकार कृषि बिल को होल्ड पर रख सकती है। वहीं सूत्रों का कहना है कि सरकार राज्यों पर भी कृषि कानून को लागू करने का फैसला छोड़ सकती है।

नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान संगठनों के नेता शुक्रवार को फिर अपनी मांगों को लेकर विज्ञान भवन में केंद्रीय मंत्रियों से बात करेंगे।

किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं जबकि सरकार नये कानूनों में संशोधन करने और एमएसपी पर खरीद जारी रखने का लिखित आश्वासन देने को तैयार है।

केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग को लेकर किसान 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।

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