उत्तर प्रदेश में करारी हार के बाद मध्य प्रदेश में जड़ें मजबूत करने में जुटी बहुजन समाज पार्टी

पार्टी का पूरा जोर इस बात पर है कि संगठन को वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मुकाबले के लिए तैयार किया जाए। इसके लिए अब जिला और ब्लाक स्तर पर गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। मध्य प्रदेश में बसपा की स्थिति दिनोंदिन कमजोर होती जा रही है।
उत्तर प्रदेश में करारी हार के बाद मध्य प्रदेश में जड़ें मजबूत करने में जुटी बहुजन समाज पार्टी

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मध्य प्रदेश में जड़ें मजबूत करने में जुट गई है।

पार्टी अध्यक्ष मायावती ने बड़ा बदलाव करते हुए मप्र संगठन को चार जोन (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और रीवा) में बांट दिया है। इसके साथ ही 26 जिला प्रभारी और छह जिला अध्यक्ष बदल दिए हैं।

पार्टी का पूरा जोर इस बात पर है कि संगठन को वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मुकाबले के लिए तैयार किया जाए। इसके लिए अब जिला और ब्लाक स्तर पर गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। मध्य प्रदेश में बसपा की स्थिति दिनोंदिन कमजोर होती जा रही है।

पार्टी ने वर्ष 1993 और 1998 के विधानसभा चुनावों में सर्वाधिक 11-11 सीटें जीतीं थीं। तब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ एक राज्य हुआ करते थे। इसके बाद बसपा कभी इस स्थिति में नहीं पहुंच सकी।

अलबत्ता ग्वालियर-चंबल और विंध्य क्षेत्र में पार्टी का खासा प्रभार बना रहा। पार्टी ने यहां भाजपा और कांग्रेस के खेल को बिगाड़ने का काम किया।

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