Merry Christmas 2019: 'क्रिसमस ट्री' सजाने का है बहुत रोचक इतिहास, जानें, क्यों है इस पेड़ से इतना लगाव

Merry Christmas 2019: 'क्रिसमस ट्री' सजाने का है बहुत रोचक इतिहास, जानें, क्यों है इस पेड़ से इतना लगाव

क्रिसमस ट्री सजाने का अपना एक रोचक इतिहास रहा है। और इस इतिहास से कई कड़ियां भी जुड़ी हैं। तो आइए आज क्रिसमस पर इस ट्री की पवित्रता और इतिहास को जानें।

अगर आप ये सोचते हैं कि क्रिसमस ट्री को सजाना केवल सजावट के दृष्टीकोण से होता है तो आपकी ये सोच गलत है। दरअसल क्रिसमस ट्री को पवित्रता से जोड़ा गया है और यदि इसे वास्तु के लिहाज से देखें तो ये नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला होता है। इसे ईश्वर का रूप माना गया है और यही कारण है क्रिसमस पर इस ट्री को अपनी यथा शक्ति खूब सजाया जाता है और इसे घर में ले आना बहुत ही पवित्र माना गया है। क्रिसमस ट्री सजाने का अपना एक रोचक इतिहास रहा है। और इस इतिहास से कई कड़ियां भी जुड़ी हैं। तो आइए आज क्रिसमस पर इस ट्री की पवित्रता और इतिहास को जानें।

डगलस, बालसम या फर का पेड़ होता है क्रिसमस ट्री

क्रिसमस ट्री एक सदाबहार पेड़ है। डगलस, बालसम या फर के पेड़ को ही क्रिसमस ट्री के रूप में माना गया है। जगह और स्थान पर इस पेड़ की उपलब्धता के आधार पर इसे क्रिसमस में सजाया जाता है। इस पेड़ को सजाने की परंपरा मिस्र, चीन या हिब्रू लोगों ने की थी। उस समय वे लोग इन पेड़ों को फूल-मालाओं से सजाया करते थे और इसे जीवन की निरंतरता का प्रतीक मानते थे। उनका विश्वास था कि यदि इन पौधों को घरों में लगाया जाए तो बुरी या नकारात्मक शक्तियां दूर रहेंगी। वे इस पेड़ को ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक मानते थे।

पश्चिम जर्मनी ने शुरू की थी इस ट्री को सजाने की शुरुआत

क्रिसमस ट्री को सजाने की शुरुआत पश्चिम जर्मनी से हुई थी। मध्यकाल में में एक बहुत ही लोकप्रिय नाटक में इस सदाबहार पेड़ को सेब से सजाया गया था और इस पेड़ को स्वर्ग का प्रतीक बताया गया था। इसके बाद से जर्मनी के लोगों ने पहली बार 24 दिसंबर को फर के पेड़ से अपने घर की सजावट की थी।

इंग्लैंड में और अमेरिका में भी शुरू हुई क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा

इंग्लैंड में प्रिंस अलबर्ट ने 1841 ई. में विडसर कैसल में पहला क्रिसमस ट्री लगाया था और उसे जब सजाया तो लोगों ने भी अपने घरों में इस पेड़ को लगाना शुरू किया और क्रिसमस पर इसे सजाया। वहीं अमेरिका के पेनिसिल्वानिया में सबसे पहले क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा शुरू हुई थी।

इसके बाद से पूरे विश्व में 'क्रिसमस ट्री' को प्रेम, पवित्रता, खुशी और भगवान का प्रतीक माना जाने लगा ओर इसे सजा कर लोग प्रभु ईशू को जन्मदिन को मनाने लगे। ये पेड़ खुशियों का प्रतीक बन गया।

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