International Woman's Day Special : मिलिए सुपर वुमन नहीं सुपर ह्यूमन कैरोलिन बोर्जेस से !
कैरोलिन बोर्जेस

International Woman's Day Special : मिलिए सुपर वुमन नहीं सुपर ह्यूमन कैरोलिन बोर्जेस से !

उनकी अपील है सबसे आप देसी डॉग्स पालें। सड़को पर इतने स्ट्रीट डॉग्स हैं और हम इंडियंस हैं तो सबसे पहले हमें देसी कुत्तों को अडॉप्ट करना चाहिए।

आप का नाम कैरोलिन बोर्जेस है , आप लखनऊ के सेंट फ्रांसिस स्कूल में अध्यापिका हैं। अध्यापिका होने के साथ ही आप समाजसेविका भी हैं। आप लोगों में जानवरों के प्रति प्यार फैलाना चाहती हैं स्पेशली फॉर डॉग्स। जिसके लिए वो सालों से कार्यरत हैं और आज भी उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी हैं। कैरोलिन रोज रात को 11 से 1 के बीच स्ट्रीट डॉग्स को फीड करने निकलती हैं और करीब 300 -350 डॉग्स को वो डेली खाना खिलाती हैं। कैरोलिन किसी संस्था से नहीं जुडी हैं क्योकि वो अपने आप में एक पूरी संस्था हैं।

कैरोलीन कहती हैं "ये डॉग्स नहीं मेरे बच्चे हैं और मै अपने बच्चों को बहुत प्यार करती हूँ और ये भी मुझे उतना ही प्यार करते हैं। जानवर कभी छल कपट नहीं करते, उनका प्यार सच्चा होता है। आप जब भी उन्हें प्यार करोगे बदले में आपको दोगुना प्यार ही मिलेगा "

कैरोलीन कहती हैं "ये डॉग्स नहीं मेरे बच्चे हैं और मै अपने बच्चों को बहुत प्यार करती हूँ और ये भी मुझे उतना ही प्यार करते हैं। जानवर कभी छल कपट नहीं करते, उनका प्यार सच्चा होता है। आप जब भी उन्हें प्यार करोगे बदले में आपको दोगुना प्यार ही मिलेगा "

कैरोलिन का मानना है कि सेवा करने के लिए हमें किसी संस्था से जुड़ने की जरुरत नहीं है। हम मदद की शुरुआत कहीं से भी और कभी भी कर सकते है। उनका मानना है की जिस तरह से इंसानो को प्यार की जरुरत होती है उसी तरह जानवरो को भी प्यार दुलार चाहिए। बल्कि जानवरों में आपको ज्यादा प्यार और वफादारी मिलेगी बस उसे समझने वाला चाहिए। डॉग्स बेजुबान होते है तो अगर आपमें उनके प्रति प्यार और लगाव तो आप उनकी भाषा जरूर समझ जाओगे।

कैरोलिन पेशे से टीचर हैं इसलिए उनका ये कहना है कि एक टीचर को बच्चो को सीखाने से पहले खुद वो वही काम करना चाहिए जो वो बच्चो को सिखाना चाहती है। उनकी दिनचर्या उनके स्कूल के बच्चो के साथ शुरू होती है और वो अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ एक अच्छा इंसान बनने की और बेज़ुबान जानवरों के प्रति प्यार करने की शिक्षा देती हैं। आप अपने स्कूल के बच्चों को डॉग्स शेल्टर होम ले जाती हैं और वह उनके बारे में बात करते हैं ,टाइम स्पेंड करते है ताकि वो बच्चे भी उनके लिए प्यार महसूस करें और उनमें बेज़ुबानो को समझने की फीलिंग्स डेवलप हो सके क्योंकि इसी उम्र में तो हम बच्चों सिखाते हैं दूसरों के दर्द को समझना , उनकी मदद करना

उनकी अपील है सबसे आप देसी डॉग्स पालें। सड़को पर इतने स्ट्रीट डॉग्स हैं और हम इंडियंस हैं तो सबसे पहले हमें देसी कुत्तों को अडॉप्ट करना चाहिए।

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