लखनऊ: बड़े घल्लूघारे (बड़े नरसंहार) में हुए शहीदों को किये गये श्रद्धा सुमन अर्पित

लखनऊ: बड़े घल्लूघारे (बड़े नरसंहार) में हुए शहीदों को किये गये श्रद्धा सुमन अर्पित

दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरुद्वारा प्रबन्शक कमेटी के अध्यक्ष स0 राजेन्द्र सिंह बग्गा जी ने घल्लूघारे में हुए शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये।

दिनांक 09-02-2021 को श्री गुरु सिंह सभा, ऐतिहासिक गुरूद्वारा नाका हिण्डोला, लखनऊ में बड़े घल्लूघारे (बड़ा नरसंहार) में हुए शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये।

इस अवसर पर प्रातः का दीवान श्री सुखमनी साहिब जी के पाठ से आरम्भ हुआ उसके उपरान्त हजूरी रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह जी ने आसा की वार का शबद कीर्तन गायन कर समूह संगत को निहाल किया।

ज्ञानी सुखदेव सिंह जी ने बड़े घल्लूघारे (बड़े नरसंहार) में हुए शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए बताया किबड़ा घललूघारा 9 फरवरी को 1762 को कुपरहिरा से लगभग 12 किमी के उत्तर में स्थित मलेरकोटला पंजाब में अहमद शाह दुर्रानी को अपने मुखबिर की सूचना मिलने पर सिक्खी को तबाह करने और हमला करने के लिए आया था।

उस समय सिंह 40000 जिसमें 10000 महिलाएं और बच्चे और बुजुर्ग लोक शामिल थे। सिंह अपनी महिलाओं को सुरक्षा के लिए बीकानेर ले जाना चाहते थे। अहमद शाह ने अगले दिन उन्हें पूरी तरह से मारने का इरादा किया। भीखन खान मालेरकोटला के जैन खान ने 9 फरवरी 1762 को 20000 लोगों और तोपों के साथ हमला किया। अब्दाली भी 30000 लोगों के साथ हमले में शामिल हुआ। सरदार जस्सा सिंह और चरत सिंह ने अपनी महिलाओं को घेरने का आदेश दिया और युद्ध की रणनीति के रूप में बरनाला की ओर आगे बढ़ते रहे।

सिंहों का एक मात्र उद्देश्य अपनी महिलाओं को किसी तरह से बचाना था और दुश्मन से लड़ना था ताकि उनका अधिकतम नुकसान हो सके। इस प्रक्रिया में सिंह भारी पड़ गये थे। इस संहार में लगभग 25000 से 30000 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 19 लोगों के साथ सरदार छत्र सिंह को मार दिया गया था। लेकिन सिंहो ने इस नरसंहार के बाद भी कभी मनोबल नहीं खोया। 1762 के दौरान एक बार फिर लाहौर को घेरने में सक्षम हो गए।

दल के रक्षक सरदार जस्सा सिंह अहलूवालिया कई मौकों पर शाह की टुकड़ियों ने घेरा तोड़ दिया और असहाय असंतुष्टों को मौत के घाट उतार दिया। सिखों के जीवन के नुकसान का अनुमान 20,000 से 50,000 तक हुआ यह सिखों के लिए एक गंभीर झटका था लेकिन उनका मनोबल फिर भी कम न हुआ।

दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरुद्वारा प्रबन्शक कमेटी के अध्यक्ष स0 राजेन्द्र सिंह बग्गा जी ने घल्लूघारे में हुए शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये। कार्यक्रम का संचालन सतपाल सिंह मीत ने किया। तत्प्श्चात श्रद्धालुओं में चाय का लंगर वितरित किया गया।

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