नसीरूद्दीन शाह के भतीजे अली शाह की नई उड़ान है 'यारा', मेजर से एक्टर बनने का सफर भी है काबिले तारीफ
mohammad ali shah

नसीरूद्दीन शाह के भतीजे अली शाह की नई उड़ान है 'यारा', मेजर से एक्टर बनने का सफर भी है काबिले तारीफ

एएमयू के कुलपति जमीरउद्दीन शाह के बेटे और नसीरूद्दीन शाह के भतीजे मेजर अली शाह अब फिल्मी दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं. कल रिलीज होने वाली फिल्म 'यारा' में अली साह लीड रोल में नजर आएंगे. फिल्म में श्रुति हसन और विद्युत जामवाल भी लीड रोल में हैं.

एएमयू के कुलपति जमीरउद्दीन शाह के बेटे और नसीरूद्दीन शाह के भतीजे मेजर अली शाह अब फिल्मी दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं. कल ही रिलीज होने जा रही फिल्म 'यारा' में अली साह लीड रोल में नजर आएंगे. फिल्म में श्रुति हसन और विद्युत जामवाल भी लीड रोल में हैं. फिल्म ZEE5 पर रिलीज हो रही है.

फ़िल्म के बारे में बात करते हुए अली शाह ने बताया कि- 'मैं आपको बताना चाहता हूँ कि इस रोल के लिए मैंने क्या क्या नहीं किया, मैं चाहता तो आसान रास्ता अपना सकता था पर नहीं मैं इसमें अपनी जान डालना चाहता था. इस रोल के लिए मैंने बहुत तप किया है ये रोल मेरी वास्तविकता से बहुत दूर है इसमें मेरा कैरेक्टर एक पुलिस ऑफ़िसर का है. यहाँ पर शुरू में मैंने एक यंग ऑफ़िसर की भूमिका निभाई और जैसे जैसे मेरी उम्र बड़ी मैं इसमें जॉइंट डायरेक्टर CBI के रोल में दिखाई दूँगा'.

उन्होंने आगे कहा, 'मैंने श्री गुरुग्रंथ साहिब जी अंग्रेज़ी ट्रांसलेशन में पढ़ा. मैं बार-बार अपनी लाइनें याद करता रहता था क्योंकि मुझे जुनून था कि मैं कुछ कर दिखाना है और इतनी सारी कहानियां हैं जो जीवन भर के लिए मेरे मन में समा गईं. इस रोल को करते करते मैं ख़ुद ही घुल गया आज मैं आप लोगों से दरख्वास्त करता हूँ कि मेरी ये फ़िल्म 30 जुलाई ज़ी 5 पर आने वाली है आप ज़रूर देखिएगा, इसको मिस मत कीजिए यह मेरे जीवन की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है।'

अली ने आगे कहा, 'शायद मैं थियेटर के मंच का खिलाड़ी रहा हूँ तो मैंने इस रोल को बहुत शिद्दत के साथ किया है. सबसे पहले मैंने स्मोकिंग छोड़ दी क्योंकि मैं जानता था कि सरदार कम्युनिटी में लोग स्मोक नहीं करते हैं उसके बाद मैंने दाढ़ी रखनी शुरू कर दी ,छह मीटर वाली पगड़ी बाँधना सीखा. मुझे अच्छे से याद है 1 दिन अचानक शॉट देने का टाइम आया तो जो ड्रेस पहनने वाले दादा थे, वो कहीं मिल नहीं रहे थे तो मैंने फटा फट बिना किसी के इंतज़ार किए वो पगड़ी ख़ुद से बांधनी शुरू कर दी. सब हैरान हो गए कि मैंने इतनी अच्छी पगड़ी बांधी। एक महीना मैं गोल्डन टेम्पल अमृतसर में रहा. मैंने वहाँ पर सेवा की, फ़र्श को साफ़ किया, झाड़ू लगाया, गंदे बर्तन साफ़ किए ,खाना परोसा, चाय बनायी और थोड़ी थोड़ी पंजाबी भी सीख ली.'

'यारा' का एक सीन
'यारा' का एक सीन

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