बिहार के थानों की रोजमर्रा की जरूरतें होंगी पूरी, बनेगा 'आत्मनिर्भर कोष'

ग्रेड ए श्रेणी के थानों को जहां प्रत्येक महीने 25 हजार रुपये दिए जाएंगें, वहीं बी श्रेणी के थानों को प्रति महीने 15 और सी श्रेणी यानी छोटे थानों को इस कोष में 10 हजार रुपये की राशि प्रति महीने दी जाएगी।
बिहार के थानों की रोजमर्रा की जरूरतें होंगी पूरी, बनेगा 'आत्मनिर्भर कोष'

बिहार में थानों की व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए सरकार अब आत्मनिर्भर कोष बनाएगी। इस कोष से थानों को राशि दी जाएगी जिससे वह अपनी जरूरतों की पूर्ति कर सके।

पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए बजाप्ता थानों का श्रेणीवार निर्धारण किया है। पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि अक्सर देखा जाता था कि गवाहों को न्यायालय ले जाने के लिए या प्राथमिकी दर्ज करने आने वाले लोगों को कागज उपलब्ध करवाने के लिए भी पुलिस अधिकारी को अपने पॉकेट से खर्च करना पड़ता था या कोई 'दूसरा' इंतजाम करना पड़ता था। अब इन समस्याओं को दूर करने के लिए आत्मनिर्भर कोष की व्यवस्था की गई है।

इसकी जिम्मेदारी जिले के पुलिस अधीक्षक को दी गई है। उन्होंने बताया कि इस कोष के तहत थानों के छोटे-छोटे खचरें का उचित प्रबंधन करना है। पहले इन खचरें को थानों द्वारा खर्च करने के बाद उसकी रसीद को जिलों में देना पड़ता था तब खर्च की गई राशि मिलती थी।

अधिकारी बताते हैं कि इसके लिए राज्य के सभी थानों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। ग्रेड ए श्रेणी के थानों को जहां प्रत्येक महीने 25 हजार रुपये दिए जाएंगें, वहीं बी श्रेणी के थानों को प्रति महीने 15 और सी श्रेणी यानी छोटे थानों को इस कोष में 10 हजार रुपये की राशि प्रति महीने दी जाएगी।

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को इससे संबंधित विस्तृत पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है, थानों में रोजमर्रा के निष्पादन में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों को को देखते हुए सरकार ने थानों को आत्मनिर्भर बनाने के आत्मनिर्भर कोष बनाने और खर्च करने का निर्देश दिया है।

पत्र में कहा गया है कि इस कोष से 31 तरह के खर्च किए जा सकेंगे, जिसमें साफ-सफाई, दरवाजा-खिड़की की मरम्मत, गवाहों को ल्यालनय तक लाने और ले जाने में होने वाले वाहन खर्च लावारिस शवों को वाहन से सम्मानपूर्वक ले जाने के खर्च सहित कई अन्य खर्चो को शामिल किया गया है।

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