कोरोना की तीसरी लहर: बच्चों के उपचार के लिए दिल्ली में टास्क फोर्स गठित

कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के उपचार को लेकर दिल्ली में एक टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टास्क फोर्स तय करेगी कि दिल्ली में बच्चों के लिए कितने आईसीयू बेड या ऑक्सीजन बेड की आवश्यकता है।
कोरोना की तीसरी लहर: बच्चों के उपचार के लिए दिल्ली में टास्क फोर्स गठित

कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के उपचार को लेकर दिल्ली में एक टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टास्क फोर्स तय करेगी कि दिल्ली में बच्चों के लिए कितने आईसीयू बेड या ऑक्सीजन बेड की आवश्यकता है।

बच्चों को किस प्रकार प्रकार के उपकरण की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार के मुताबिक दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर के दौरान 37 हजार नए कोरोना रोगी प्रतिदिन सामने आ सकते हैं। 37 हजार कोरोना रोगी प्रतिदिन के हिसाब से दिल्ली सरकार को रोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगली लहर से मुकाबले के लिए 420 टन ऑक्सीजन स्टोरेज क्षमता तैयार की जा रही है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड से बात की गई है और उन्हें 150 टन ऑक्सीजन उत्पादन का प्लांट लगाने के लिए कहा गया है। हालांकि इसके लिए कंपनी ने 18 महीने का समय मांगा है। दिल्ली के लिए 25 नए ऑक्सीजन टैंकर खरीदे जाएंगे। 64 ऑक्सीजन के छोटे छोटे प्लांट लगाए जा रहे हैं। अगले 2 महीने के अंदर यह सभी ऑक्सीजन प्लांट लगा लिए जाएंगे।

विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर आने की बात कही है। आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों ने भी कोरोना की तीसरी लहर के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार की है। इसको देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़े स्तर पर ऑक्सीजन भंडारण उत्पादन एवं वितरण की व्यवस्थाएं शुरू करने का निर्णय किया है। अस्पतालों में बच्चों के लिए बेड बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस बार कोरोना की पीक में 28 हजार मामले प्रतिदिन आए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना की अगली पीक में 37 हजार मामले मानकर तैयारी शुरू की जा रही है। ऐसा नहीं है कि 37 हजार से ज्यादा मामले आने पर हमारी तैयारी नहीं होगी। हमने 37 हजार की संख्या को एक आधार माना है यदि हमने इसके हिसाब से तैयारी कर ली तो हम इससे अधिक मामले आने पर भी कोरोना महामारी से निपट सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमें यह तय करना है कि हमें कितने आईसीयू की जरूरत पड़ेगी, कितने बेड की आवश्यकता पड़ेगी, कितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ेगी। बच्चों के लिए कितने बेड की आवश्यकता पड़ेगी। इन सारी चीजों का अनुमान लगाया जा रहा है।

दिल्ली सरकार ऑक्सीजन सिलेंडर की तैयारियों पर भी ध्यान दे रही है। पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने चीन से 6000 ऑक्सीजन सिलेंडर आयात किए हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब हम देख रहे हैं कि दिल्ली को आने वाली पीक में और कितने ऑक्सीजन सिलेंडर एवं ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की आवश्यकता होगी। आने वाले दिनों में हम बड़ी संख्या में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक दिल्ली सरकार द्वारा दो अहम निर्णय लिए गए हैं। एक तो यह है कि व्हाट्सएप पर खूब तेजी से कोरोना की दवाई को लेकर सूचनाएं फैलाई जा रही थी। उसको लेकर भी काफी अफरातफरी देखी गई। सरकार चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की एक टीम बनाएगी। यह टीम तय करेगी किस दवाई से कोरोना में लाभ होगा। सरकार ऐसी दवाई को अधिक से अधिक संख्या में उपलब्ध कराएगी।

वहीं व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों से जिस दवाई की जानकारी सार्वजनिक की जा रही है और उस दवाई से कोई फायदा नहीं है तो जनता को इस बारे में जागरूक किया जाएगा कि इस दवाई के पीछे भागना बंद कीजिए।

जो आवश्यक दवाएं हैं उनकी सूची बना ली गई है। इन दवाओं का कितना स्टॉक चाहिए उतना बफर स्टॉक बनाया जाएगा। प्राइवेट अस्पतालों को भी आदेश दिए गए हैं कि वे भी अपने अस्पतालों में इस प्रकार के बफर स्टॉक महामारी से निपटने के लिए बनाएं।

दिल्ली सरकार ने इसके साथ ही एलएनजेपी और आईएलबीएस अस्पताल में जिनोम सीक्वेंसिंग लैबोरेट्री बना रही है। ताकि पता लग सके कि दिल्ली के अंदर जो भी वैरीअंट आ रहा है वह कोरोना का कौन सा वेरीएंट है। इन प्रयोगशालाओं से पता लग सकेगा यह पुराने वाला वेरिएंट है या फिर कोरोना का कोई नया वेरिएंट है। नया वेरिएंट आने पर किस प्रकार की सावधानी की आवश्यकता है यह भी इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से पता लग सकेगा।

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