नई आबकारी नीति के तहत दिल्ली सरकार को मिलेगा 3,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा शराब पर लगने वाले टैक्स को लाइसेंस शुल्क में बदलने के बाद से राजधानी में सक्रिय शराब माफिया बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, क्योंकि 300 प्रतिशत कर प्रोत्साहन उनका स्रोत था।
नई आबकारी नीति के तहत दिल्ली सरकार को मिलेगा 3,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व

नई आबकारी नीति के लागू होने के बाद दिल्ली सरकार को एक साल में 3,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने बुधवार को यह घोषणा की। सिसोदिया ने बुधवार दोपहर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "वित्तीय वर्ष 2019-2020 की तुलना में, हमें नई आबकारी नीति के मद्देनजर 10,000 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो ना केवल दिल्ली सरकार के इस नीति के साथ आने के विचार का समर्थन करेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर शराब माफिया के अस्तित्व पर हमारे संदेह को भी सच साबित करेगा।"

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा शराब पर लगने वाले टैक्स को लाइसेंस शुल्क में बदलने के बाद से राजधानी में सक्रिय शराब माफिया बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, क्योंकि 300 प्रतिशत कर प्रोत्साहन उनका स्रोत था।

एक आधिकारिक हलफनामे में कहा गया है कि दिल्ली की एनसीटी सरकार ने हाल ही में वर्ष 2021-2020 के लिए अपनी नई आबकारी नीति पेश की, जिसका उद्देश्य 'दिल्ली में नकली शराब या गैर-शुल्क भुगतान वाली शराब की बिक्री को खत्म करना और उपभोक्ता अनुभव को बदलना' के साथ-साथ सरकार के लिए राजस्व प्राप्त करना है। अत्यधिक जटिल अत्यधिक विनियमित उत्पाद शुल्क व्यवस्था को सरल बनाना, व्यापार करने में आसानी सुनिश्चित करना और किसी एकाधिकार या कार्टेल के गठन की अनुमति नहीं देना।

उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश में शराब के अनुभव को बदलने की योजना बनाई है, जिसके तहत शराब की दुकानों (जिन्हें आमतौर पर 'ठेका' कहा जाता है) में सड़क की ओर खुलने वाली खिड़कियां नहीं होंगी। इसे पूरी तरह से नया रूप दिया जाएगा, जिसमें लोग चल-फिरकर खरीदारी कर सकेंगे। नई दुकानों का संचालन 17 नवंबर से शुरू हो जाएगा।

दिल्ली के राजस्व की समस्या पर प्रकाश डालते हुए, सिसोदिया ने कहा कि महामारी के कारण दिल्ली अन्य राज्यों की तुलना में राजस्व के मोर्चे पर बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा, "जबकि हमारे जीएसटी संग्रह में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है। वैट में 25 प्रतिशत, उत्पाद शुल्क में 30 प्रतिशत, स्टांप शुल्क में 16 प्रतिशत और मोटर वाहनों में 19 प्रतिशत की गिरावट आई है।"

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