प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना राहत पैकेज के तहत दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब, जानिए पूरा मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों को बाहर करने का आरोप लगाते हुए कोविड लॉकडाउन के दौरान शुरू की गई योजना की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना राहत पैकेज के तहत दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब, जानिए पूरा मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों को बाहर करने का आरोप लगाते हुए कोविड लॉकडाउन के दौरान शुरू की गई योजना की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया।

जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र को इस मामले में आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को 20 अक्टूबर के लिए टाल दिया।

जन धन खाता मानदंड और प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना (पीएमयूवाई) के तहत मुफ्त सिलेंडर के संबंध में जनहित याचिका में मुद्दों का विरोध किया गया।

दिल्ली निवासी आकाश गोयल द्वारा अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि पीएमजीकेवाई के तहत 500 रुपये की अनुग्रह राशि प्राप्त करने के लिए जन धन खाता होने की शर्त एक बहिष्करण मानदंड थी।

सुनवाई के दौरान, केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थायी वकील अनिल सोनी ने आश्वासन दिया कि सरकार उन सुधारों का आकलन करेगी जो वह कर सकते हैं और मामले पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अगस्त 2020 के दौरान लॉकडाउन के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक गैर सरकारी संगठन एक्शन एड एसोसिएशन द्वारा किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण का हवाला देते हुए गरीब और निम्न-आय वाले परिवारों के अनौपचारिक श्रमिकों के निम्न स्तर को कल्याणकारी योजनाओं में नामांकित किया गया था।

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