Dalmia Group की लैंडमार्क प्रॉपर्टी डेवलपमेंट कंपनी के खिलाफ कोर्ट ने धोखाधड़ी का स्टेट केस चलाने का दिया आदेश

डालमिया ग्रुप की कंपनी पर शेयर ट्रांसफर के नाम पर धोखाधड़ी कर ₹53.14 करोड़ हड़पने का आरोप है, जिसकी एफआईआर 16 फरवरी 2019 में थाना टीपी नगर मेरठ में दर्ज कराई गई थी।
Dalmia Group की लैंडमार्क प्रॉपर्टी डेवलपमेंट कंपनी के खिलाफ कोर्ट ने धोखाधड़ी का स्टेट केस चलाने का दिया आदेश

एडिशनल सिविल जज सीनियर डिवीजन ने डालमिया ग्रुप की लैंडमार्क प्रॉपर्टी डेवलपमेंट कंपनी के डायरेक्टर्स के खिलाफ धोखाधड़ी के मुकदमे को स्टेट केस की भांति दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के एमएन राय द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।

डालमिया ग्रुप की कंपनी पर शेयर ट्रांसफर के नाम पर धोखाधड़ी कर ₹53.14 करोड़ हड़पने का आरोप है, जिसकी एफआईआर 16 फरवरी 2019 में थाना टीपी नगर मेरठ में दर्ज कराई गई थी।

कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई की दौरान थाना टीपी नगर द्वारा मामले में दाखिल फाइनल रिपोर्ट को भी डिसमिस करने के योग्य बताया। अदालत को दाखिल केस में बताया गया है कि अंसल प्रॉपर्टीज एण्ड इन्फाटक्चर लिमिटेड व आरोपित अभियुक्तगण लैण्डमार्क टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के बीच दिनांक 13 सितंबर 2004 को एक ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट हुआ था जिसके तहत दोनों कंपनियां मेरठ करनाल तथा गाजियाबाद की 246 एकड़ भूमि पर कालोनी विकसित करना था।

इसी बीच 21 दिसम्बर 2012 को दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया गया कि लैण्डमार्क ग्रुप अंसल प्रॉपर्टीज एण्ड इन्फाटक्चर लिमिटेड समूह से बाहर निकल जायेगा तथा अपने 50 प्रतिशत शेयर अंसल समूह को ट्रांसफर कर देगा।

आरोप है कि लैण्डमार्क प्रॉपर्टी डेवलपमेंट एण्ड कम्पनी ले डायरेक्टर आदि पदों पर तैनात पदधिकादियों ने केवल 4 फीसदी शेयर ट्रांसफर किये। अंसल प्रॉपर्टीज द्वारा जांच करने पर पता चला कि शेष 46 फीसदी शेयर बैंक के पास गिरवी के तौर पर बंधक पड़े थे और उनको ट्रांसफर नहीं किया जा सकता था। फिर भी कपटपूर्ण तरीके से शेयर परचेज एग्रीमेन्ट के दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए गए व ₹53.14 करोड़ हड़प लिए गए।

इसी मामले की सुनवाई करते हुए विद्वान एडिशनल सिविल जज सीनियर डिवीज़न ने राकेश अग्रवाल, मैनोजिंग डायरेक्टर गौरव डालमिया, मृदु डालमिया, पदमा डालमिया, आभा डालमिया व रघुहरि डालमिया के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 190(1)ख के अन्तर्गत आईपीसी की धारा 420,406, 120बी के तहत मुकदमा चलाने का आदेश देते हुए इस स्टेट केस की भांति दर्ज करने का आदेश पारित किया।

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