लखनऊ में जारी मौत का सिलसिला, एंबुलेंस नहीं मिलने से कोविड के मरीज की मौत

लखनऊ में जारी मौत का सिलसिला, एंबुलेंस नहीं मिलने से कोविड के मरीज की मौत

शासन-प्रशासन कितने भी दावे कर ले, लेकिन राजधानी में कोरोना मरीजों की बदहाली की दास्तां किसी से छुपी नहीं है। एक कोरोना मरीज दो दिनों से एंबुलेंस का इंतजार करता रहा।

शासन-प्रशासन कितने भी दावे कर ले, लेकिन राजधानी में कोरोना मरीजों की बदहाली की दास्तां किसी से छुपी नहीं है। एक कोरोना मरीज दो दिनों से एंबुलेंस का इंतजार करता रहा।

उसका बेटा बार-बार सीएमओ से लेकर अन्य अधिकारियों व कोविड कंट्रोल रूम के कर्मचारियों से पिता को भर्ती कराने का इंतजार करता रहा। मगर न तो अस्पताल को एलॉटमेंट हुआ और न ही उसके घर एंबुलेंस भेजी गई। लिहाजा गुरुवार को मरीज ने दम तोड़ दिया।

इसके अलावा मरीज सुशील सिंह की भी मौत हो गई। कोविड-19 रिपोर्ट नहीं आने के चक्कर में उनका इलाज नहीं हो पा रहा था। लिहाजा बाद कार में ही दो दिन से अस्पताल के गेट के बाहर पड़े थे गुरुवार को रिपोर्ट आने के बाद उन्हें विवेकानंद अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन आज सुबह मौत हो गई।

राजाजीपुरम निवासी अभिषेक वर्मा ने बताया कि उनके पिता चंद्रिका प्रसाद वर्मा की कोरोना रिपोर्ट सोमवार को पॉजिटिव आई थी। इस दौरान उनका आक्सीजन स्तर लगातार गिर रहा था। उनकी सांसें उखड़ रही थी। कई दिन से हेल्पलाइन पर काल कर रहा था।

अभी-तभी का बहाना किया जा रहा था। बाद में सीएमओ से भी मरीज को भर्ती कराने के लिए निवेदन किया। फिर उसे एक दिन पहले एरा मेडिकल कॉलेज अलॉट होने की बात बताई गई, लेकिन एंबुलेंस नहीं भेजी गई। इस बीच वह लगातार अधिकारियों कर्मचारियों से एंबुलेंस के लिए गिड़गिड़ाता रहा।

मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इधर पिता चंद्रिका प्रसाद ने वृहस्पतिवार को आठ बजे दम तोड़ दिया। अभिषेक ने कहा कि यदि मेरे पिता समय से भर्ती हो गए होते तो उनकी जान बच गई होती।

अस्पताल के बाहर छोड़ गई एंबुलेंस, फर्श पर पड़ा बुजुर्ग मरीज: कोविड लक्षणों वाले एक मरीज को बुधवार की रात एंबुलेंस अकेले बीमार देखकर सिविल अस्पताल लाकर छोड़ गई, लेकिन मरीज को किसी ने भर्ती नहीं किया।

इंदिरानगर निवासी अरुण कुमार ने बताया कि रात में एंबुलेंस उन्हें लाई थी। तबसे फर्श पर बाहर ही पड़े हैं। घर में कोई नहीं है। सांस में दिक्कत हो रही है।

कोरोना समझ मरीज को नहीं किया भर्ती: इसी तरह आलमबाग निवासी 65 वर्षीय उर्मिला को सांस में काफी दिक्कत हो रही थी। वह लखनऊ के सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भटकती रही, लेकिन कोरोना चक्कर में किसी भी अस्पताल ने उनकी भर्ती नहीं ली।

किसी अस्पताल में आरटीपीसीआर भी जांच नहीं हो सकी। उनकी तबीयत लगातार गंभीर होती जा रही थी।

सिविल के मरीजों को अब मिलेगी 24 घंटे आक्सीजन :

कोरोना मरीजों व नॉन कोविड संदिग्ध मरीजों में लगातार आक्सीजन की मांग बढ़ रही है। इसको देखते हुए सिविल अस्पताल में अब आक्सीजन कंसेंट्रेटर की शुरुआत की गई है। इससे मरीजों के बेड तक सीधे आक्सीजन पहुंचाई जा सकेगी।

निदेशक डा. सुभाष सुंदरियाल ने बताया कि अभी तक मरीजों को आक्सीजन देने के लिए सिलिंडर का सहारा लिया जाता था। अब मरीजों को सीधे आक्सीजन सप्लाई की जा सकेगी।

बलरामपुर में भर्ती मरीजों को पूछने वाला कोई नहीं:

बलरामपुर अस्पताल में मरीज भर्ती तो करा दिए जा रहे हैं, लेकिन भर्ती के बाद उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। कई मरीजों का आक्सीजन स्तर गिर रहा है तो कुछ को बाईपेप व वेंटिलेटर की जरूरत महसूस हो रही है।

मरीज डाक्टर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इस बारे में डाक्टर जीपी गुप्ता से बात करने पर कहा कि अब पूर्व सीएमओ डा. वीके पांडेय को प्रभारी बनाया गया है। वही बता पाएंगे।

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