गोरखपुर: जानें मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का इतिहास

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन एवं अन्य अनुषांगिक विषयों में अध्ययन, अनुसन्धान, प्रौद्योगिकी विकास, एवं नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी|
गोरखपुर: जानें मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का इतिहास

सन 1962 में स्थापित मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोरखपुर के महत्त्व और उसकी प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 203 में विधानमंडल के अधिनियम संख्या 22 के माध्यम से इस अभियंत्रण महाविद्यालय को उच्चीकृत करते हुए विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया|

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन एवं अन्य अनुषांगिक विषयों में अध्ययन, अनुसन्धान, प्रौद्योगिकी विकास, एवं नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी|

अपने स्थापना काल से ही यह प्रयत्न किया जा रहा है कि यह विश्वविद्यालय देश ही नहीं बल्कि दुनिया के उच्च तकनीकी शिक्षण एवं अनुसन्धान के महत्पूर्ण केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित हो|

इन्हीं प्रयासों का यह परिणाम है कि विश्वविद्यालय को वर्ष 2019 में देश के शीर्ष 15 राजकीय/ निजी तकनीकी संस्थाओं में शामिल किया गया, इंडिया टुडे रैंकिंग (2018) में पूरे देश के तकनीकी संस्थानों में 35वां स्थान, टाइम्स इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट सर्वे (2018) में देश के उभरते हुए संस्थानों में 6वां स्थान, 'हैकरेंक डॉट कॉम' द्वारा कोडिंग/ प्रोग्रामिंग दक्षता में विश्व में 44वां स्थान प्राप्त हुआ है|

विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में स्नातक स्तर पर इंजीनियरिंग की सात शाखाओं क्रमशः सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, केमिकल, एवं आई टी में बी टेक सहित बी बी ए एवं बी फार्म पाठ्यक्रम चलाये जा रहे हैं|

परास्नातक स्तर पर 12 विशेषज्ञताओं में एम्‌ टेक पाठ्यक्रम, एम सी ए, एम बी ए, एवं एम एस सी (भौतिकी, गणित, एवं रसायन) पाठ्यक्रम तथा विभिन्‍न विधाओं में पी एच डी पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं|

विश्वविद्यालय के चार पाठ्यक्रम क्रमशः बी टेक सिविल इंजीनियरिंग, बी टेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, बी टेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एवं बी टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग एनबीए (NBA) एक्रीडिटेड हैं|

बी टेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की एनबीए (NBA) एक्रीडिटेशन प्रक्रिया चल रही है| साथ ही अध्ययन अध्यापन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय ने नैक (NAAC) एक्रीडिटेशन के लिए आवेदन कर दिया है| विश्वविद्यालय को यूजीसी अधिनियम की धारा 12 (B) के मान्यता प्राप्त है|

देश दुनिया के अन्य शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों से अकादमिक आदान प्रदान हेतु विश्वविद्यालय ने 28 विश्वविद्यालाओं, शोध संस्थानों से समझौता करार किये हैं जिनमें प्रमुख हैं क्लाउड लैब, मेलबर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया; विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय, अमेरिका; नार्थ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका; सेंट्रल मिशिगन यूनिवर्सिटी, अमेरिका; राइक्यूस यूनिवर्सिटी, जापान; यूनिवर्सिटी कालोंस डी मेड्रिड, स्पेन; वॉरसों मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी, पोलैंड। आई आई टी कानपुर; आई आई टी रुड़की, आई आई एम्‌ इंदौर, एनआईटी सूरत, एनआईटी प्रयागगाज, आईआईआईटी, प्रयागराज; राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी शोध संस्थान, नागपुर; एवं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज आदि प्रमुख हैं|

हाल ही में विश्वविद्यालय ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्‌, नयी दिल्ली के साथ शिक्षक प्रशिक्षण, सहित अन्य योजनाओं का लाभ लेने हेतु समझौता किया है| इस समझौते के अंतर्गत, विश्वविद्यालय को शिक्षक प्रशिक्षण, सहित गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के कौशल विकास, विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को और समृद्ध करने, एवं छात्रों को ए आई सी टी ई इंटर्नशिप की सुविधा मिलेगी|

विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करते हुए स्नातक स्तर पर अपनी पाठ्यक्रम संरचना को पूरी तरह परिवर्तित कर उसे ज्यादा रोजगारोन्मुख और उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुकूल बनाया है| नयी पाठ्यक्रम संरचना में कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के विकास पर ज्यादा जोर दिया गया है|

बी टेक में इस वर्ष से आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्‍यूरिटी, और इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स में माइनर डिग्री स्पेशलाइजेशन की शुरुआत होगी| भविष्य में आर्किटेक्चर, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और डाटा साइंस में भी पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है| साथ ही ड्रोन टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिकल व्हीकल की दिशा में शोध और अनुसन्धान के लिए सेंटर फॉर एक्सीलेंस बनाने की दिशा में भी विश्वविद्यालय कार्यरत है|

छात्रों में कौशल एवं उद्यमिता के विकास हेतु उद्यमिता एवं कौशल विकास केंद्र की स्थापना की गयी है| हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता को दोगुना करते हुए 500 किलोवाट का एक और सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की दिशा म॑ कार्य किया जा रहा है आर्थिक तंगी के कारण किसी छात्र की पढाई बीच में न रुके, इसके लिए “मालवीय छात्र कल्याण निधि' की स्थापना की गयी है|

इस निधि से माता-पिता या स्वयं छात्र की किसी गंभीर बीमारी/दुर्घटना के कारण मृत्यु/ शारीरिक विकलांगता की दशा में आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी|

इसके अतिरिक्त, निम्न अन्य महत्वपूर्ण बिंदु भी शामिल किये जा सकते हैं|

- चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू।

- शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ाने के लिए मालवीय आउटस्टैंडिंग टीचर्स अवार्ड', “मालवीय एक्सीलेंट स्टूडेंट अवार्ड", एवं मालवीय उत्कृष्ट सेवा सम्मान' का प्रावधान।

- अध्ययन अध्यापन में सुविधा के लिए प्रोजेक्टर एवं कंप्यूटर युक्त 30 नए क्लासरूम। ऑडियो विडियो सुविधा एवं लाइव वेबकास्टिंग युक्त 10 नए स्मार्ट क्लास निर्माणाधीन|

- सभी विभागों में सुसज्जित सम्मेलन/ संगोष्ठी कक्ष |

- तीन नए छात्रावासों- कस्तूरबा भवन, तिलक भवन एवं रामानुजन भवन का निर्माण। पूर्वनिर्मित छात्रावासों का विस्तार एवं सुविधाओं का उच्चीकरण|

- उच्चस्तरीय खेल सुविधाओं से युक्त शहीद बंधू सिंह स्टेडियम का निर्माण। नए प्रशासनिक भवन एवं महिला छात्रावास का शिलान्यास| 2000 की क्षमता का सुसज्जित सभागार निर्माणाधीन।

- बी टेक द्वितीय वर्ष में पिछले वर्ष के परीक्षाफल के आधार पर ब्रांच परिवर्तित कर सकने का विकल्प शुरू किया गया|

- छात्रों में नवोन्मेष एवं उद्यमिता के विकास के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित अटल टिंकरिंग लैब्स कार्यक्रम में एमएमएमयूटी का मेंटर संस्थान के रूप में चयन|

- विवि के दो दर्जन से ज्यादा शिक्षकों को विभिन्‍न राष्ट्रीय संस्थाओं से शोध एवं विकास लिए अनुदान प्राप्त हुए|

- हिंदी में काम काज को बढ़ावा देने के लिए हिंदी समिति का गठन| एआईसीटीई द्वारा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में पाठ्यपुस्तक लेखन हेतु अनुदान योजना का आरम्भ|

- शैक्षणिक गुणवत्ता का ध्यान रखने के लिए नियमित शैक्षणिक ऑडिट कराये जाने का आरम्भ|

- विश्वविद्यालय और उद्योग जगत में बेहतार ताल मेल स्थापित करने के लिए यूनिवर्सिटी इंडस्ट्री इंटरेक्शन सेल का गठन|

- आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के लिए मालवीय एलुमनाई एसोसिएशन द्वारा छात्रवृत्ति का आरम्भ|

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