Lakhimpur Violence: लखीमपुर खीरी में किसानों की अंतिम अरदास में शामिल हुईं प्रियंका गांधी, सिख संगठन ने किया विरोध

संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रियंका गांधी को अपना मंच देने से इन्कार किया, हालांकि मोर्चे ने प्रियंका गांधी का और उनकी पार्टी का आभार जताया। किसान नेताओं ने इसके साथ ही चेतावनी भी दी है कि वह राजनेताओं को अपना मंच साझा नहीं करने देंगे।
Lakhimpur Violence: लखीमपुर खीरी में किसानों की अंतिम अरदास में शामिल हुईं प्रियंका गांधी, सिख संगठन ने किया विरोध

लखीमपुर हिंसा में मारे गए चार किसानों की आत्मा की शांति के लिए मंगलवार को तिकुनिया में अंतिम अरदास शुरू हो गई है। घटनास्थल से करीब एक किमी की दूरी पर 30 एकड़ भूमि पर यह कार्यक्रम चल रहा है। कार्यक्रम में यूपी के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से करीब 50 हजार किसान पहुंचे हैं।

सबसे पहले पलिया से आए रागी जत्थे ने गुरुवाणी का बखान कर संगत को निहाल किया। कार्यक्रम में मृतक किसानों के परिवार वालों और घायल किसानों को भी बुलाया गया है।

अरदास में शामिल होने के लिए कई सियासी नेता भी पहुंचने वाले हैं। प्रियंका गांधी लखीमपुर पहुंच गई हैं। हालांकि उन्हें सीतापुर में रोक गया था। रालोद नेता जयंत चौधरी भी आ रहे हैं। हालांकि संयुक्त मोर्चा ने ऐलान किया है कि अरदास कार्यक्रम के मंच पर कोई सियासी नेता नहीं बैठेगा। जो भी नेता इस कार्यक्रम में आएगा वह पब्लिक के साथ बैठेगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रियंका गांधी को अपना मंच देने से इन्कार किया, हालांकि मोर्चे ने प्रियंका गांधी का और उनकी पार्टी का आभार जताया। किसान नेताओं ने इसके साथ ही चेतावनी भी दी है कि वह राजनेताओं को अपना मंच साझा नहीं करने देंगे। वहां पर टकराव की आशंका में भारी पुलिस बल सोमवार रात से एकत्र है।

लखीमपुर खीरी में मंगलवार की सुबह कड़ी सुरक्षा में किसानों की अंतिम अरदास शुरू हो गई। हजारों की संख्या में किसानों का आना भी शुरू हो गया। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित की गई इस अंतिम अरदास में मंच पर दीवान हाल सजाया गया और दिवंगत किसानों की आत्मा की शांति के पाठ व प्रार्थना की गई। लखीमपुर खीरी कांड में मारे गए किसानों के परिवारीजन भी इस अंतिम अरदास में मौजूद रहे।

तिकुनिया में आयोजित इस अंतिम अरदास कार्यक्रम का संचालन संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी डा. दर्शनपाल सिंह कर रहे हैं। एक तरफ जहां किसान नेता उस घटना पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त कर रहे थे वहीं दूसरी ओर अटूट लंगर का आयोजन भी चल रहा है। मंच से किसानों नेताओं ने एक बार फिर सरकार को आगाह किया कि तीन अक्टूबर को हुई घटना लोमहर्षक है और इसके सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए बिना संयुक्त मोर्चा मानने वाला नहीं है। किसान नेताओं ने ये भी कहा कि केंद्रीय मंत्री के बेटे को तो गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन, अभी केंद्रीय मंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि किसानों की मांगों में यह दोनों मांगे प्रमुख रूप से शामिल की गई थी।

वहीं अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य परविंदर सिंह ने निशाना साधते हुए कहा कि अपनी राजनीति के लिए प्रियंका गांधी लखीमपुर पहुंचकर माहौल खराब कर रही हैं। उन्होंने हमलावर अंदाज में कहा कि 1984 में सिखों पर अत्याचार करने वाली कांग्रेस, कैसे सिख किसानों की हितेषी हो सकती है। केवल राजनीति करना प्रियंका का उद्देश्य है. सिंह ने कहा कि हमें प्रियंका की फर्जी सहानुभूति नहीं चाहिए और इस मामले में सरकार की कार्रवाई चल रही है। परविंदर सिंह ने डीजीपी को भी पत्र लिखते हुए लखीमपुर में माहौल खराब होने की स्थिति में सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है।

वहीं गुरु नानक वाटिका कमेटी के अध्यक्ष सरदार रविंद्र पाल सिंह ने कहा कि जिस पार्टी के हाथ सिखों के खून से रंगे हैं वह इंसाफ क्या दिलाएंगे? प्रियंका गांधी की पार्टी लखीमपुर में जाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का काम कर रही है और समाज को बांट रही है। प्रियंका जब-जब लखीमपुर जाएंगी उनका विरोध होगा और उन्हें इस पर राजनीति नहीं करने दी जाएगी।

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