नवजात जुड़वा बच्चों की मौत के लिए यूपी के अस्पताल मालिकों की हुई गिरफ्तारी

नवजात जुड़वा बच्चों की मौत के लिए यूपी के अस्पताल मालिकों की हुई गिरफ्तारी

बाराबंकी के अवध चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के मालिकों को नवजात जुड़वां बच्चों की मृत्यु के लिए गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने ऑक्सीजन की कमी होने के कारण बच्चों को एडमिट करने से इनकार कर दिया गया था।

बाराबंकी के अवध चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के मालिकों को नवजात जुड़वां बच्चों की मृत्यु के लिए गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने ऑक्सीजन की कमी होने के कारण बच्चों को एडमिट करने से इनकार कर दिया गया था। पुलिस ने कहा कि आरोपी सैयद मोहम्मद साकिब और सैयद मोहम्मद आमिर पर महामारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) बाराबंकी, डॉ आर एन वर्मा और एसएचओ पंकज सिंह की जांच टीम ने अस्पताल के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। जांच में पता चला कि शिशुओं को अस्पताल लाया ही नहीं गया था, बल्कि पड़ोस में स्थित एक क्लीनिक में उनकी मौत हुई है।

साथ ही जांच में यह भी पता चला कि 24 अप्रैल को बच्चों की चिकित्सा के लिए बनी इकाई में ऑक्सीजन थी, जबकि अस्पताल ने दावा किया है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौतें हुई हैं।

बाराबंकी के यमुना प्रसाद ने कहा, "जिला प्रशासन को अवध चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में दो शिशुओं की मौत के बारे में टीवी चैनलों के माध्यम से पता चला, जिसके बाद मामले का तेजी से संज्ञान लिया गया और एक जांच दल गठित किया गया।"

जांच के दौरान अस्पताल के मालिक के बड़े भाई सैयद मोहम्मद अमीर और ऑन ड्यूटी डॉक्टर डॉ शादाब रसूल ने पुलिस को बताया कि शिशुओं को सोमवार सुबह 7.15 बजे भर्ती कराया गया था, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी मौत हो गई।

एसपी ने कहा, "ऐसा ही बयान अस्पताल के मालिक ने टीवी चैनलों पर भी दिया।"

हालांकि, जांच से पता चला कि 21 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच अस्पताल के पास 13 बड़े ऑक्सीजन सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता थी और उनके पास पर्याप्त स्टॉक था।

पुलिस अधिकारी ने कहा, "अस्पताल मालिक के झूठे बयानों के कारण बाराबंकी में मरीजों के बीच दहशत फैल गई।"

पुलिस की टीम ने अस्पताल परिसर की तलाशी ली, साथ ही बच्चों के माता-पिता, एथेशम और मंतशा से बात की।

बता दें कि सोमवार को राज्य सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से मरने वाले बच्चों की खबरों का खंडन किया था और मीडिया को 'गलत' रिपोर्ट दिखाने के लिए दोषी ठहराया था।

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