किसानों के मुद्दे पर विपक्ष ने किया यूपी विधानसभा और विधान परिषद में हंगामा

किसानों के मुद्दे पर विपक्ष ने किया यूपी विधानसभा और विधान परिषद में हंगामा

यूपी विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को विपक्षी दलों ने जबरदस्त हंगामा किया। किसान आंदोलन के पक्ष में विपक्षी दलों ने विधानसभा तथा विधान परिषद में हंगामा किया। इसके बाद कार्यवाही 30 मिनट के लिए रोकनी पड़ी।

यूपी विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को विपक्षी दलों ने जबरदस्त हंगामा किया। किसान आंदोलन के पक्ष में विपक्षी दलों ने विधानसभा तथा विधान परिषद में हंगामा किया। इसके बाद कार्यवाही 30 मिनट के लिए रोकनी पड़ी।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने किसानों के प्रदर्शन के दौरान मृत लोगों को शहीद का दर्जा देने की मांग की। विधान भवन में शुक्रवार को बजट सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा में हंगामा होने लगा। पहले तो कार्यवाही आधा घंटा के लिए स्थगित की गई।

इसके बाद इसको आधा घंटा और बढ़ाया गया। जब हंगामा बढ़ा तो विधान सभा को 12 बजे तक नहीं चलाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान राम गोंविद चौधरी ने सदन में मांग की जो किसान इस आंदोलन में शहीद हुए है, उन्हें सरकार शहीद का दर्जा दे।

चौधरी ने किसानों के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से चर्चा की अनुमति मांगी, और कहा कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलित हैं। वे कानून वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं।

गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदेश के हर कोने से किसान पहुंच रहे हैं। सरकार ने आदेश दिया कि किसानों के ट्रैक्टर में डीजल न भरा जाए। किसानों को दबाने की हर कोशिश हो रही है। किसानों पर फर्जी मुकदमे हो रहे हैं। जो किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शहीद हुए हैं, उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए।

सपा सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। वे मंहगाई, कानून व्यवस्था और किसान आंदोलन को लेकर सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियां लेकर आए थे। पगड़ी लगाकर आए संजय लाठर 'हां, मैं आंदोलनजीवी हूं' और संतोष यादव सनी 'मैं चंदाजीवी नहीं हूं' लिखा प्लेकार्ड लिए हुए थे।

प्ले कार्ड्स पर 'भाजपा खा गई रोजगार, युवा हो गए बेरोजगार', 'जब से भाजपा आई है, कमरतोड़ महंगाई है', 'किसानों की फसलों का नहीं बढ़ रहा रेट, खेती में भी आ गया पूंजीवादी करपोरेट', 'बेटियों पर उत्पीड़न में यूपी नंबर वन', जैसे नारे लिखे हुए थे।

सदन में कुछ देर नारेबाजी के बाद सपा सदस्य सदन से बाहर चले गए। इसके बाद बसपा व कांग्रेस सदस्यों ने भी राज्यपाल के भाषण का बहिष्कार किया।

परिषद में शुक्रवार को प्रोटेम स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग को लेकर विपक्ष के नेता वेल में आ गए। यहां पर नियम 143 के तहत विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद विधान परिषद कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया।

सपा के एमएलसी आनंद भदौरिया ने कहा कि प्रोटेम स्पीकर के खिलाफ हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं और वे वहीं सीट पर बैठ कर सदन की कार्यवाही कर रहे हैं। ऐसे में 185 के तहत कोई भी कार्यवाही जब तक प्रोटेम स्पीकर नहीं कर सकता है अगर उसके खिलाफ कोई अविश्वास प्रस्ताव लाया गया हो, हम लोग प्रश्नकाल में शामिल नहीं होंगे।

कांग्रेस के दीपक सिंह ने कहा कि संविधान के नियम की सरकार अनदेखी कर रही है। सरकार के अहंकार की वजह से आज विधान परिषद स्थगित हुई। हम चाहते हैं कि प्रोटेम स्पीकर पर वोटिंग हो।

सपा के सुनील साजन ने कहा कि बहुमत समाजवादी पार्टी का है और प्रोटेम स्पीकर के खिलाफ अविश्वास है। 1956 के नियम 143 के अंतर्गत नोटिस दी गई है। प्रोटेम स्पीकर का काम शपथ दिलाने के साथ खत्म हो गया। प्रोटेम स्पीकर कैसे सदन चला सकते हैं?

हम लोगों की मांग है कि हम लोगों की नोटिस को स्वीकार कर लिया गया है तो चुनाव होना चाहिए।

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